शनिवार, 19 जनवरी 2013

शहद-एक उपयोगी औषधि (Benefits of Honey).-2


1.        शहद के साथ ब्राह्मी के पत्तों के सेवन से मिरगी के दौरे आना बंद होता हैं।
2.         प्रतिदिन तीन बार एक-एक चम्मच शहद एक गिलास पानी में मिलाकर पिलाने से पीलिया रोग में लाभ होता है।
3.         शहद को घोडा बच के साथ मिलाकर दिन में दो बार सेवन से क्रोध शांत होने लग जाता है। शहद के साथ गिलोय का रस मिलाकर दिन में दो बार सेवन से पित्त द्वारा उत्पन्न क्रोध शांत होने लगता है।
4.    हृदय की घबराहट, कमजोरी जब महसूस हो तो गुनगुने पानी में शहद घोलकर दिन में दो-तीन बार नियमित सेवन करें।
5.     शहद हृदय शक्ति के लिए औषधियों में सर्वोत्तम हैं हृदय फेल होने से बचाता है। जब हृदय की धड़कन बढ़ जाये, दम घुटने लगे तो शहद सेवन करने से (दिल की कमजोरी, दिल का बैठना आदि ) हृदय सबल व मजबूत बनता है।
6.         काली मिट्टी में शहद डालकर फोड़े-फुंसिया पर लगाने से फायदा होता है।
7.         उच्चरक्तचाप कम करने के लियें शहद का प्रयोग लगभग एक सप्ताह तक करें।
8.         शहद को गुनगुने पानी से एक डेढ़ माह तक नियमित सेवन से से हर प्रकार के चमड़ी रोग (दाद- खाज-खुजली चकते एवं कोढ़ के रोग भी ) ठीक हो जाते है।
9.         शहद में 1 /4 ग्राम शुद्ध गन्धक को मिलाकर खाने से खुजली पूरी तरह से ठीक हो जाती है।
10.       शहद में कलौंजी का चूर्ण मिलाकर चाटने से याददास्त तेज होती है।
11.       30 ग्राम शहद के साथ 20 ग्राम घी मिलाकर भोजन के बाद नित्य सेवन से याददास्त तेज होती है। (सावधानी :मात्रा का विशेष ध्यान रखे, समान मात्रा में घी और शहद जहर होता है )
12.       शहद और पीपल चूर्ण छाछ के साथ पीने से छाती के दर्द में लाभ मिलता है।
13.       शहद के साथ लगभग 1 /4  भाग चांदी की भस्म सुबह और शाम को लेने से बुद्धि के विकास में वृद्धि होती है।
14.       शहद का सेवन खाने के बाद के पेट दर्द समाप्त होते है। पानी से शहद मिलाकर पीने से भी पेट दर्द में राहत आती है।
15.       शहद के साथ लगभग 1 /4 भाग जटामांसी का चूर्ण रोगी को सुबह और शाम देने से कम्पन के दोरों में (कंपकंपाना) लाभ मिलता हैं।
16.       जिस ओर सिर में दर्द हो रहा हो उसके दूसरी ओर के नाक के नथुने में एक बूंद शहद डालने से आधे सिर के दर्द में आराम मिलता है।
17.       रोजाना भोजन में शहद लेने से आधे सिर दर्द में आराम व उल्टी बंद हो जाती हैं।
18.       शहद या गुड़ के साथ पके हुए गूलर के फल खाने से नकसिरी बंद हो जाती है।
19.       नींबू का रस और शहद को सामान मात्रा में मिलाकर रात को सोने से पहले सेवन करे नींद खुले तब पुन: ले पानी के साथ शहद डालकर पीने से भी अच्छी नींद आ जाती है।
20.       शहद चाटने से या शहद को पानी में मिलकर दिन में दो बार पीने से पेट के कीड़े मर जाते है।
21.       शहद का रोज दूध में मिलाकर सेवन करने से कमजोरी दूर होकर सामान्य मोटापा बढ़ता हैं।
22.       शहद में लगभग 2 ग्राम पोस्ता पीसकर या शहद में लगभग 10 ग्राम बहेड़ा चूर्ण मिलाकर सुबह शाम सेवन करने से अच्छी नींद आती है।
23.       चूना और शहद को अच्छी तरह से मिलाकर फोड़े पर लगाने से आराम आता है।
24.       शहद में 1 / 4 भाग केसर मिलाकर या शहद और त्रिफला सामान मात्रा में मिलाकर सुबह-शाम सेवन से शीतपित्त में लाभ मिलता है।
25.       शहद को मुंह में भरकर कुछ देर तक रखकर कुल्ला करें। इससे तेज प्यास शांत हो जाती है।
26.       अधिक तेज प्यास को शांत करने के लिए शहद को मुंह में 10 मिनट तक रखें और कुल्ला कर दें। पानी में शहद मिलाकर पीने से गले की जलन व प्यास मिटती है।
27.       मोच या चोट के स्थान पर शहद और चूना मिलाकर लेप करे और इसका असर स्वयं देखे ।
28.       शहद में चुटकी भर अफीम घिसकर चाटने से पेचिश का रोग दूर हो जाता है।
29.       एक कप शहद पानी में मिलाकर एक माह तक सेवन करने से शरीर का लकवा ठीक हो जाता है।
30.       शहद और दूध मिलाकर पीने से नपुंसकता (वीर्य) की कमी दूर होती है। और शरीर बलवान होता है।
31.       शहद में काला नमक और नींबू का रस मिलाकर सेवन करने से हिचकी में आराम आता है।या प्याज के रस में शहद मिलाकर या सिर्फ शहदको उंगली से चाटने से भी हिचकी बंद हो जाती है।
32.       गर्भावस्था में महिलाओं के लिए शहद आवश्यक टानिक है महिलाओं को चाहिए की ( गर्भधारण के शुरू से ही या अंतिम तीन महीनों में) दो चम्मच शहद का दूध के साथ नियमित सेवन करने से रक्त की कमी दूर होकर शारीरिक शक्ति बढ़ती है और बच्चा ह्रष्ट पुष्ट बुद्धिमान और सुन्दर होता है।
33.       निमोनिया रोगी के शरीर की पाचन-क्रिया ध्वस्त हो जाती है इसके लिए सीने तथा पसलियों पर शुद्ध शहद की मालिश करें और थोड़ा सा शहद गुनगुने पानी में मिलाकर निमोनिया रोगी को पिलाये।
34.       छोटी मक्खी का शहद, अदरक का रस, नींबू का रस और सफेद प्याज का रस इन सबको मिलाकर और छानकर एक बूंद हर शाम आंखों में डालते रहें इससे मोतियाबिंद दूर हो जाता है।और इसमे गुलाब जल डालकर रोजाना आँखों में डालने से आंखों की रोशनी तेज होकर चश्मा हट जाता है।
35.       शुद्ध शहद हफ्ते मे 1 से 2 बार डालने से आंखों की रोशनी कभी कम नही होती, बल्कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ तेज होती है । साथ ही चार पांच बादाम रात को भिगो दे सुबह उठते ही चार पांच काली मिर्च और मिश्री के साथ पीसकर चाटे या चबाकर और ऊपर से दूध पी लें ।
36.       शहद या एरण्ड तेल (कस्टर आयल) की 1 से 2 बूंद आंखों मे डालने से आंख में गिरी हुई चीज बाहर आ जायेगी और आंखों की चुभन दूर हो जायेगी।
37.       स्त्री-संग सम्भोग से एक घण्टा पहले पुरुष की नाभि में शहद लगाये पुरुष का जल्दी स्खलन नही होता और लिंग शिथिल नहीं पड़ता।
38.       शहद और अदरक का रस समान मात्रा में मिलाकर सुबह-शाम के सेवन से जुकाम ठीक हो जाता है और भूख भी बढ़ जाती है।
39.       एक गिलास गुनगुने दूध में 2 चम्मच शहद और आधे चम्मच मीठे सोडे को एक साथ मिलाकर दिन में दो बार पीने से जुकाम,फ्लू ठीक हो जाता है।यह मिश्रण पीते वक्त सुरक्षित कमरे में होना चाहिए जंहा बाहरी हवा न लगे क्योंकि इससे रोगी को बहुत पसीना आता है जिसमे हवा का लगना नुकसानदायक हो सकती है।
40.       शहद में सेंधानमक और हल्दी को एक कप पानी में डालकर उबाल लें। गुनगुना होने पर सोते समय पीने से जुकाम ठीक होता है।
41.       शहद में गुड़ मिलाकर या केवल शहद को चाटने से उल्टी बंद हो जाती है।
42.       शहद में लौंग चूर्ण मिलाकर चाटने से गर्भावस्था के समय आने वाली उल्टी से छुटकारा मिल जाता है।
43.       काली खांसी के लिए सबसे  पहले कब्ज को दूर करे उसके बाद सौंफ, धनियां तथा अजवायन को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें। इसका दिन में तीन बार सेवन करना चाहिए। इससे कब्ज दूर होती है। तथा शहद में लौंग के तेल की एक बूंद तथा अदरक के रस की दस बूंदे मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करे।
44.       पायरिया के लिए शहद की मसूढ़ों तथा दांतों पर मालिश करे या नींबू का रस, नीम का तेल तथा शहद मिलाकर या शहद में लहसुन, करेला, अदरक का रस मिलाकरमसूढ़ों की मालिश करके गुनगुने पानी से कुल्ला करे। इससे पायरिया तथा मसूढ़ों के रोग खत्म हो जाते हैं।
45.       गले के बैठ जाने पर मुलहठी का चूर्ण शहद के साथ चाट़े या फूली हुई फिटकरी चूर्ण शहद में मिलाकर सेवन करें। इसमें पानी मिलाकर कुल्ला किया जा सकता है।
46.       बहेड़ा के चूर्ण को शहद के साथ सुबह और शाम सेवन करने से या गुनगुने पानी में शहद मिलाकर गरारे करने से भी आवाज खुल जाती है।
47.       शहद में हल्दी पाउडर, अजवायन और सौंठ को मिलाकर सेवन करें तथा सोने से पहले अजवायन का तेल छाती पर मलें।
48.       ताजे पानी से आंखों को सुबह नियमित धोए दो बूंदे नीम का रस तथा दुगना शहद मिलाकर आंखों में लगाए। गिलोय का रस तथा शहद को मिलाकर आँखों में लगायें या गिलोय का रस और आधी मात्रा में शहद मिलाकर और आंखों में नियमित लगायें। अथवा शहद, सफ़ेद प्याज का रस, अदरक का रस और निम्बू का रस को समान मात्रा में मिलाकर हर शाम आंखों में लगाकर सो जांए। आंखों की खुजली, दर्द, मोतियाबिंद आदि सभी रोगों के लिए यह उपयोगी है। शहद को आंखों में लगाने से रतौंधी रोग दूर होता है। आंखों की रोशनी भी बढ़ती है।
49.       तवे पर सुहागे को फुलाकर शहद के साथ छालों पर लगाना चाहिए। इससे मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।
50.       शहद में छोटी इलायची चूर्ण मिलाकर मुंह के छालों पर लगायें।
51.       फिटकरी को पानी में घोल कर शहद के साथ मिलाकर कुल्ला करें। यह कुल्ला भोजन करने से पहले सुबह, दोपहर तथा शाम को करना चाहिए।
52.       त्रिफला चूर्ण शहद के साथ ले या केवल आंवले का चूर्ण शहद के साथ लेने से भी पेट की गर्मी शांत हो कर मुंह के छाले ठीक होने लगते हैं।
53.       आंख में जलन के लिए शहद के साथ निबौंली (नीम का फल) का गूदा मिलाकर आंखों में काजल की तरह लगना चाहिए।
54.       शुद्ध शहद को सलाई या अंगुली की सहायता से काजल की तरह आंख में लगायें। या सिर पर शुद्ध शहद का लेप करें ।
55.       शहद में दुगनी मात्रा में देशी घी मिलाकर सिर पर लगाए। और सूखने से पहले दोबारा दर्द ठीक होने तक फिर से लगाये । साथ ही थोड़ा शहद चाटीए या भोजन के साथ शहद लेने से सिर का दर्द दूर हो जाता है।
56.       पेट की खराबी, सर्दी या गर्मीके कारण सिर दर्द हो तो नींबू के रस में शहद को मिलाकर माथे पर लेप करे ।अथवा शहद में थोडा चूना मिलाकर माथे के दर्द वाले भाग लगा देने से सिर का दर्द ठीक हो जाता है।
57.       सौंफ, धनियां तथा अजवायन बराबर मात्रा में लेकर तीनों के पिसे चूर्ण को शहद के साथ प्रतिदिन तीन बार सेवन करने से कब्ज दूर होती है। धनिये तथा जीरे का चूर्ण बना लें और शहद में मिलाकर चाटीए इससे अम्लपित्त समाप्त होता है। सौंठ, कालीमिर्च, पीपल, सेंधानमक इन सब का चूर्ण या दो कालीमिर्च तथा दो लौंग के चूर्ण को दिन में तीन बार शहद के साथ चाटने से भूख लगना प्रारम्भ हो जाता है।
58.       अजवायन का चूर्ण को शहद के साथ दिन में तीन बार लेने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।
59.       पानी में नींबू का रस तथा शहद मिलाकर पीने से अजीर्ण समाप्त हो कर भूख खुल कर लगने लगती है। इसके लिए शहद में दो काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर या अजवायन तथा सौंठ से बना चूर्ण भी शहद के साथ चाट सकते है ।
60.       पेट के दर्द के लिए शुद्ध शहद ताजा पानी में मिलाकर पीने से या सौंठ को शहद में मिलाकर चाटने से काफी लाभ होता है।या तुलसी की दो पत्तियां पीस कर शहद के साथ सेवन करें।
61.       शहद में सौंफ, धनिया तथा जीरा का चूर्ण मिला कर दिन में कई बार चाटने से दस्तो में लाभ होता है। अनार दाना चूर्ण शहद के साथ चाटने से भी दस्त ठीक हो जाते हैं।
62.       सोने से पहले शहद का नियमित सेवन करने से बच्चों का निद्रावस्था में पेशाब निकल जाने का रोग ठीक हो जाता है।

साभार:Health@nature

बुधवार, 16 जनवरी 2013

इमाम बुखारी की गुंडागर्दी के सामने असहाय दिल्ली पुलिस



दिनांक 14/01/2013, सुबह ग्यारह बजे के करीब जामा मस्जिद के चूड़ीवालान इलाके में सात कारखानों में छापा मार कर पुलिस बल ने लगभग 33बाल मजदूरों को बरामद किया और इन सभी 7 कारखानों को सील लगा कर बंद किया तथा कारखाना मालिकों को गिरफ्तार किया गया। इस कार्यवाही में पुलिस के साथ ‘बचपन बचाओ आन्दोलन’ नामक एन जी ओ के कार्यकर्ता भी शामिल बताये जाते हैं। पुलिस कार्यवाही के होते ही गिरफ्तार कर्खान्दारों ने इमाम अहमद बुखारी की शरण ली और पुलिस कार्यवाही से बचाने के लिए उनको मौके पर ले आये। इमाम बुखारी ने बल श्रम विभाग की इस कार्यवाही के खिलाफ उसी वक़्त जमा मस्जिद के लाउड स्पीकर से पुलिस को ललकारा, और ऐलानिया इस कार्यवाही को मुसलमानों पर ज़ुल्म बताया, कानून को चुनौती दी की ‘हमारे इलाके में घुस कर ये जालिमाना हरकत करने की जुर्रत कैसे की गई? ” इसके बाद इमाम बुखारी उस ही वक़्त मौके पर गए और अपने हाथ से, सातों दुकानों पर, पुलिस द्वारा लगाई सील तोड़ी। इसके बाद कारखाना मालिकों को भी पुलिस थाने से ही छुड़वा लिया गया और 33 में से 12 बाल श्रमिक व्यस्क बताये गए लिहाज़ा 21 बल श्रमिकों को अभी भी पुलिस की हिफाज़त में ही रखा गया है।
इस घटना ने व्यवस्था की चरमराहट को कई जगह से ज़ाहिर किया है। सबसे पहले तो ये की पुरानी दिल्ली कारखानों और कारोबार का केंद्र है जहाँ खुलेआम बाल श्रमिक काम पर लगाये गए हैं, ऐसी स्तिथि में जहाँ खुद कारखाना मालिकों के अपने बच्चे भी बाल श्रम कर रहे हैं क्यूंकि ये बहोत ग़रीब वर्ग के कारखाने हैं जहाँ कारोबार में मार्जिन इतना नहीं की पूरी तनख्वाह पर श्रमिक को अनुबंधित किया जा सके, दूसरे ये की कानूनों में हुई तब्दीलियों से भी ये वर्ग वाकिफ नहीं क्यूँ की ये मालिक खुद भी अशिक्षित हैं। तीसरे ये, कि ये लगभग पुश्तैनी कारखाने हैं जहाँ दशकों से यही व्यवस्था चली आ रही है।
ऐसे में बाल श्रम विभाग किसी भी तरह का जागरूकता कार्यक्रम कभी क्यूँ नहीं चलाता ? क्यूँ पुरानी दिल्ली की इन गलियों में जहाँ कारखानों की भरमार है एक भी पोस्टर, बैनर, होर्डिंग नज़र नहीं आता जो बाल श्रम के प्रति जागरूकता पैदा करे। हालत ये है की इन बच्चों से मजदूरी करवाने वाले मालिक इस भाव से इन्हें काम पर रखते है मानो वो इन पर अहसान कर रहे हों ‘काम सिखा कर’. ये श्रमिक भी ऐसे ही कृतार्थ भाव से जो मिल जाता है वो रख लेते हैं। इन हालात में ‘बचपन बचाओ आन्दोलन’ जैसे एन जी ओ की देख रेख में सीधे छापा मार कार्यवाही की जगह विभाग खुद एक जागरूकता और वार्निंग से शुरुआत करता तो अच्छा रहता। क्यूंकि ज़मीनी हकीकत यही है की खुद कारखाना मालिक भी ग़रीब, अनपढ़ और ठेकेदारों के शोषण का शिकार है जो मार्किट मेकेनिज्म को न समझने के कारण कम मुनाफे पर अपना उत्पादन बिचौलियों को दे रहे हैं। ये भी की ‘बचपन बचाओ आन्दोलन’ अब लगभग कुख्यात हो चुका है ऐसे मामलों में पुलिस/आई ओ के साथ मिल कर सौदे बाज़ी करने के लिए। ऐसे में इतने महत्वपूर्ण कानून को एन जी ओ के ज़रिये नहीं बल्कि मंत्रालय द्वारा खुद के स्क्वाड या दस्ते बना कर लागू करना ज्यादा बेहतर होगा।
लेकिन सबसे चिंताजनक पहलू है इमाम अहमद बुखारी का ये कहना की ‘हमारे इलाके में घुस कर ये कार्यवाही करने की हिम्मत कैसे हुई‘. इमाम अहमद बुखारी अगर कारखाना मालिकों को राहत ही दिलाना चाहते थे तो कम से कम उन्हें इस बात का अहसास तो करवाने की ज़रुरत थी ही की यह एक अपराधिक ग़लती है, जो दोबारा नहीं होनी चाहिए, और इसी शर्त पर उन्हें कानून से कोई राहत मिल सकती है। पुलिस द्वारा तकमील की गई कार्यवाही को इस तरह अपने अहंकार और अराजकता के आगे रौंदना सिर्फ ये बताता है की इस शख्स के लिए देश के कानून की कोई कद्र नहीं। मुस्लिम इलाकों को कानून के दायरे से बाहर रख कर ये शख्स गुंडा-गर्दी, रंगदारी आधारित अपनी सत्ता चलाना चाहता है। फिर इमाम का राज ‘मातोश्री‘ के राज से किस तरह अलग है ? क्या पत्रकार बिरादरी पुलिस के आला अधिकारीयों से इमाम की इस हरकत पर सवाल करेगी? खुद हमने ये कोशिश की थी अभी अभी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला सिवा इसके कि पुलिस क्या करे ?
इस रिपोर्ट को फ़ाइल करने वाले पत्रकार फरहान याहया को आज सुबह से ही गाली-धमकी भरे फोन काल्स आ रहे हैं। एक कालर ने काफी सीरियस धमकियाँ दी। जिसकी वजह से उन्हें पुलिस स्टेशन का रूख करना पडा अभी आधा दिन भी नहीं बीता है और उनका जीना हराम कर दिया गया है। एक पहलु यह भी है कि फरहान साहब इसी इलाके में सपरिवार रहते हैं। आप समझ सकते हैं, उन पर किस तरह का खतरा है, ऐसे में जब ताकतवर हिंदी-उर्दू मीडिया ने जोखिम नहीं उठाया, एक उर्दू अखबार और सहाफी की हिम्मत को हमें बढ़ाना चाहिए।
{ नोट : अभी तक मेनस्ट्रीम मीडिया में इस खबर को कोई जगह नहीं दी गयी है इसलिए यह समाचार -विश्लेषण शीबा अशलम फहमी के फेसबुक वाल से साभार प्रकाशित किया गया है }:जनोक्ति डाट काम 

मंगलवार, 15 जनवरी 2013

शहद-एक उपयोगी औषधि (Benefits of Honey).-1

शहद (HONEY)
योग युगों युगों से होता आया है प्रक्रति का अनूठा करिश्मा की शहद को हजम करने की आवश्यकता नहीं होती यह एक स्वयं पचा हुआ पोषक आहार है, इसके सेवन से शरीर को सीधे तोर पर उर्जा मिलती है जिसका उपयोग बच्चे, बूढ़े, जवान और रोगी सभी कर सकते है । शहद जितना पुराना होता है उतना ही श्रेष्ठउ भी होता है । समय के साथ साथ शहद का रंग बदलने लगता है तथा लौह-तत्व भी बढ़ता जाता है। हैरतंगेज बात तो यह है कि 1923 ई. मे मिस्त्र के फराओ नूनन खामेन के पिरामिड में रूसी वैज्ञानिक को एक शहद से भरा पात्र मिला। उस समय हैरत में डाल देने वाली बात यह थी कि यह शहद 3300 वर्ष पुराना होने के बावजूद खराब नहीं हुआ था। उसके स्वाद और गुण में कोई अंतर नहीं आया था।
1.         शहद को दूध में मिला दे तो यह श्रेष्ठ और सम्पूर्ण आहार बन जाता है और रक्त में हीमोग्लोबिन निर्माण में मदद करता है।10 ग्राम शहद से 55 कैलोरी ऊर्जा मिलती है जो कि अन्य खाद्य पदार्थो में लगभग 7 अण्डों के, 130 ग्राम दूध के, 80 ग्राम प्लम के, 190 ग्राम हरे मटर के, 130 ग्राम सेब व 200 ग्राम गाजर के बराबर होती है।
2.         शहद में सभी शरीर के लिए उपयोगी तत्व (कार्बोहाइड्रेट्स, खनिज, अमीनो एसिड, प्रोटीन्स, मैग्नीशियम, पोटेशियम, केल्शियम, सोडियम किलोरिन, आयरन और विटामिन्स) पाए जाते हैं। शरीर में इन तत्वों की कमी होने से रोगों की सम्भावना तेज हो जाती है शहद में इन तत्वों की मोजुदगी शरीर को रोगों से बचाता हैं।
3.         शहद में विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स होता है, इसमें मोजूद एंजाइम्स जो की जो की भूख बढ़ाने में सहायक है शुद्ध शहद के प्रतिदिन सेवन से उम्र लंबी होती है इसके लिए किसी जड़ी या संजीवनी बूटी की आवश्यीकता नहीं है।
4.         शहद कि गुणवत्ता मधुमक्खियों दुवारा बनाये जाने वाले छत्ते के स्थान पर निर्भर करता है छत्ते के आसपास लगे फूलों के गुण शहद में संचित रहते है। नीम पर लगे छत्ते का शहद आँखों के लिए, जामुन पर लगे छत्ते का शहद मधुमेह के लिए, सहजने पर लगे छत्ते का शहद हृदय, वात तथा रक्तचाप के लिए अधिक उपयोगी होता है। शहद शीघ्र हजम होकर रक्त में मिल जाता है। शहद को दूध, दही, पानी, सब्जी, सूप, फलों के रस में मिलाकर सेवन कर सकते हैं। सर्दियों में शहद का सेवन गुनगुने दूध या पानी से करना चाहिये।

शहद एक औषधि:-
1.         शहद में मोजूद विटामिंस (B और C)त्वचा को एलर्जी से बचाता है।
HONEY INGREDIENT 
2.         शहद को खाने से मस्तिष्क स्वस्थ और पुष्ट होता है।
3.         शहद को नींबू के रस में लेने से गहरी नींद आती है।
4.         शहद चाटने से लगातार आ रही हिचकी रुक जाती है।
5.         शहद में अदरक का रस मिलाकर लेने से खाँसी से राहत मिलती है।
6.         शहद में एक बडी इलायची पीसकर पीने से पेट दर्द में फायदा होता है।
7.         शहद शूगर की मात्रा को कोलस्ट्रोल को नियंत्रित करता है। और साथ ही शरीर को ऊर्जावान बनाता है ।
8.         खट्टे फलों मोसमी, निम्बू, संतरा, अंगूर, अमरूद, गन्ना, टमाटर के साथ शहद का सेवन अमृत के सामान है।
9.         शहद को एक शानदार एंटीबैक्टीरियल और एंटिसेप्टिक माँना जाता रहा है। चोट, घाव और जले के घाव पर शहद लगाने से ये जल्दी ठीक हो जाते हैं तथा निशान भी नहीं पडते, सूजन और दर्द में भी आराम मिलता हैं और घावों से आने वाली दुर्गंध भी नष्ट होती है। शहद से नुकसान दायक बैक्टीरिया भी नष्ट हो जाते हैं शहद की पट्टी बांधने से मृत कोशिकाये पुष्ट हो जाती है।
10.       शहद में एंटीऑक्सीडेंट तत्व भी पाए जाते हैं, जो रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढाते हैं। ये कैंसर और ह्रदय की बीमारियों को भी रोकता हैं। और शक्ति का संचार होता है।
11.       शहद किडनी और आँतों को ठीक रखता है शहद को हमारे शरीर के खून को भी साफ करता हैं।
12.       शहद के नियमित सेवन से हीमोग्लोबिन बढता हैऔर शरीर में रक्त की कमी दूर हो जाती है।
13.       शहद में अदरक और तुलसी के पत्तों का रस बराबर मात्रा में मिलाकर सेवन से जुकाम ठीक होता है।
14.       शहद शीघ्रता से पच जाती है। आंतों को विश्राम मिलता है। थकान होने पर शहद का उपयोग थकान से तत्काल राहत देता है।
15.       सुबह खाली पेट नीबू और शहद का सेवन से वजन बिना किसी दोष के कम हो जाता है।
16.       सुबह नियमित शहद और नीबू का उपयोग गुनगुने पानी से करने पर मोटापा घटता है, कब्ज दूर होता है, रक्त को शुद्ध करता है।
17.       बादाम को भिगोकर पीस लें और इसे शहद मिले दूध में मिलाकर पूरे परिवार को पिलाने से परिवार के सभी सदस्य स्वस्थ होंगे ।
18.       प्याज का रस और शहद मिलाकर सेवन से उल्टी और हिचकी में रोक लगती है और फेफड़े और गले में जमा कफ भी निकल जाता है।
19.       शहद को दूध के साथ मिलकर कुछ दिन सेवन करने से पेट और आंतो के छोटे-छोटे शुरुआती घाव ठीक हो जाते है निर्बल आमाशय व आँतों को बल मिलता है।
20.       समान मात्रा में शहद व नींबू का रस सेवन करने से सूखी खाँसी में लाभ होता है और शहद व अदरक का रस मिलाकर चाटने से सांसो की तकलीफ और खाँसी में भी आराम आता है और हिचकियाँ भी बंद हो जाती हैं।
21.       रात को एक गिलास दूध में शहद मिलकर पीने से दुबलापन दूर होकर शरीर स्वस्थ, सुंदर,चुस्त, सुडौल, ह्रष्ट -पुष्ट व मजबूत बनता है और आयु को बढ़ता है।
22.       मोटापा बढ़ाने के लिए शहद को दूध में मिलाकर पिएं।
23.       शहद में विटामिन और बीकी मोजुदगी आँखों की ज्योति को बढ़ाता है व भूख बढती है ।
24.       शहद व नींबू गुनगुने पानी के सेवन से चुस्ती -स्फूर्ति आती है और कमजोरी भी दूर हो जाती है।
25.       गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर गरारे करने से गला साफ़ होता है और आवाज खुल जाती है।
26.       कब्ज होने पर सुबह-शाम शहद को गुनगुने पानी में मिलाकर पीए। प्रातः शहद-नींबू का गुनगुने पानी के साथ सेवन करने से रक्त शुद्ध होता है व कब्ज तथा मोटापे को दूर करता है।
27.       पोदीने के रस के साथ शहद का प्रयोग उल्टी को शांत करता है।
28.       लहसुन और शहद के नियमित सेवन से रक्तचाप सामान्य रहता है।
29.       टमाटर या संतरे के रस में शहद डालकर सेवन करने से कब्ज में लाभ होता है।
30.       मीठे आम का रस और शहद मिलाकर पीने से पीलिया के रोग में आराम आता है।
31.       सोते वक्त शहद व नींबू का रस मिलाकर पानी पीने से कमजोर हृदय में शक्ति का संचार होता है।
32.       शहद और प्याज का रस मिलाकर चाटने से कफ और आँतों में जमे विषेले द्रव्यों को निकाल कर कीड़े नष्ट करता है।
33.       शहद और प्याज का रस मिलाकर पानी में घोलकर एनीमा लेने से पेट सम्बन्धी रोगो में लाभ होता है आंते साफ़ होकर मजबूत होती है ।
34.       शहद में सेंधा नमक मिलाकल मलहम बना लें, इसे नासूर पर लगाने से घाव का मवाद बंद हो जाता है।
35.       मवाद पड़े घाव में पैदा बैक्टीरिया का खात्मा मनुका और शहद के सेवन से हो सकता है।
36.       शहद में दालचीनी मिलाकर दिन में दो बार चाटने से गले की टांसिल रोग ठीक हो जाता है।
37.       शहद में सिन्दूर मिलाकर पसलियों के दर्द वाले जगह पर लेप करे और पसली की सिकाई करें तो दर्द में जल्द आराम मिलता है।
38.       मनुका शहद को अगर एंटीबायोटिक दवाओं के साथ मिलाकर दिया जाए तो दवाये ज़्यादा असरदार साबित हो सकती है
39.       जिन रोगियों पर शक्तिशाली एंटीबायोटिक भी कारगर नहीं होते ऐसे संक्रमणों से निपटने के लिए मनुका और शहद का इस्तेमाल किया जा सकता है।
40.       शहद बहुत उपयोगी होता है। यह जल्दी पच जाता है। इसे हम दूध, दही, चाय, मलाई, पानी, सब्जी, फलों के रस आदि में मिलाकर ले सकते हैं।
41.       प्रतिदिन एक बादाम सुबह पानी में भिगो कर शाम को छिलका उतार कर घिस कर एक गिलास ठंडे दूध में शहद और घिसी बादाम मिलाकर घूँट-घूँटकर के सेवन करने से बल और वीर्य की वृद्धि होती है।
मां और बच्चो का टॉनिक शहद :-
1.         बच्चों को मसूडों पर शहद लगाने से दाँत आसानी से आते हैं।
2.         नव जात शिशु को जन्म से ही शहद का सेवन अमृत के सामान है।
3.         जिन बच्चों को शकर का सेवन मना है, उन्हें शकर के स्थान पर शहद दिया जा सकता है।
4.         रोजाना शहद ताजा पानी में मिलाकर शर्बत की तरह पिलाने से बच्चें की बेडोल तोंद कम हो जाती है।
5.         मां के दूध में शुद्ध शहद को मिलाकर बच्चे को एक माह तक पिलाने से सूखा रोग ठीक हो जाता है।
6.         बच्चों को एक चम्मच पानी में दो बूंद शहद मिलाकर चटाने से उनकी ग्रोथ अच्छी होती है और वे सेहतमंद रहते हैं।
7.         बच्चे जिनकी पाचन क्रिया ठीक से संचालित नहीं होती है, उन्हें दूध, दही, चावल, दलिया, केला, खीर आदि के साथ-साथ थोड़ी मात्रा में शहद दे दिया जाए तो पाचन आसानी से हो जाता है।
8.         शहद को मां के दूध के बाद सर्वाधिक पोषक तत्व संज्ञा दी गई है। बच्चों के शारीरिक विकास एवं पाचन क्रिया को सुचारु रखने के लिए जिन पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, लगभग वे सभी पोषक तत्व शहद में पाए जाते हैं।
9.         गर्भवती महिला द्वारा दो चम्मच शहद रोजाना लेने से उसे रक्त की कमी नहीं होती।
10.       गर्भावस्था के दौरान स्त्रियों द्वारा शहद का सेवन करने से पैदा होने वाली संतान स्वस्थ एवं मानसिक दृष्टि से अन्य शिशुओं से श्रेष्ठ होती है।
शहद की मात्रा:-
बच्चे के लिए 10 से 15, युवक के लिए 30 से 35, पुरूष के लिए 30 से 50 और एक वर्द्ध के लिए 20 से 30 ग्राम प्रतिदिन पर्याप्त मानी गयी है।
सावधानियां :
1.         शहद को कभी गर्म नहीं करना चाहिए।
2.         शहद को मांस, मछली के साथ कदापि न खायें।
3.         शहद को चाय या काफी के साथ इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
4.         शहद के साथ दूध या पानी समान मात्रा में मिलकर सेवन हानिकारक है।
5.         शहद को चीनी, गुड़ और मिश्री के साथ मिलाना अमृत को जहर बनाने जैसा है।
6.         शहद को समान मात्रा में घी, तेल या मख्खन के साथ मिलकर सेवन जहर के समान है।
7.         हर रोज एक चम्मच शहद का सेवन ही फायदेमंद है, शहद का अधिक मात्रा में सेवन फायदे की बजाए नुक्सान कर सकता है ।
साभार: Health@nature 

बुधवार, 9 जनवरी 2013

बलात्कार : हिन्दुत्व के संस्कारों का अवमूल्यन या पाश्चात्य प्रभाव मे इस्लामी उद्दीपन


कई दिनो से पूरे देश मे बलात्कार के खिलाफ माहौल बना हुआ है (या बनाया गया है इसके लिए यहाँ क्लिक करे)। बलात्कार के खिलाफ माहौल बनाया गया हो या माहौल स्वयंस्फूर्त हिन्दुस्थानी जनता की सरकारी निकम्मेपन के खिलाफ विषादयुक्त अभिव्यक्ति हो दोनों परिस्थितियों मे एक बात पर बिलकुल ही संशय नहीं है की सामाजिक मर्यादाएं टूट रही हैं। इस पर एक विस्तृत परिचर्चा की आवश्यकता होगी । बलात्कार जैसे जघन्य कृत्य का किसी भी प्रकार से समर्थन या आरोपी का बचाव खुद को बलात्कारी की श्रेणी मे खड़ा करने सदृश्य होगा॥
मगर एक प्रश्न जिसपर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है वो की  मर्यादा पुरुषोत्तम राम के देश मे मर्यादा का हनन क्यू हो रहा है क्या तथाकथित सभ्य समाज ने अपनी मान्यताएँ बदल दी हैं या मान्यताएं टूट रही हैं। हालाँकि व्यभिचार हर समय कही न कही न्यूनाधिक मात्र मे उपस्थित रहा है फिर भी  यदि भारतीय परिवेश मे देखें तो मुगल काल मे इस प्रथा का कई कारणो से बहुत प्रचार हुआ इसका ज्वलंत स्तम्भ आगरे का मीना बाजार है जहाँ तथाकथित महान राजा अकबर ने सिर्फ महिलाओं के लिए एक बाजार बनवाया था बाजार पर उसकी सर्वदा नजर रहती और कोई खूबसूरत हिन्दू कन्या दिखते ही वो उसे अपने हरम मे रखने के लिए उसका शिकार करने निकाल पड़ता ॥ इसी मुगलकालीन खौफ से हिन्दू बहने अपन शील बचाने हेतु जौहर(समूहिक रूप से आत्मदाह) तक करने लगी ।
धीरे धीरे अंग्रेज़ आए और जैसा की उन्होने सर्वदा से नारी को एक उपभोग की वस्तु समझा है उन्होने मुगलो के क्रम को आधुनिकता का चोला पहनाते हुए नारी का मतलब “उपभोग और यौन इच्छा की पूर्ति की एक वस्तु”  के रूप मे प्रचारित किया वही इस्लामिक परिभाषा मे नारी “बच्चे पैदा करने की मशीन” से ज्यादा कुछ नहीं होती।
मगर अब ये प्रश्न उठता है की मुगल चले गए ,अंग्रेज़ चले गए फिर भी ये पाशविकता क्यू?? और दिल्ली के दामिनी(बदला हुआ नाम) बलात्कार एवं हत्याकांड मे हालाँकि बर्बरता की सीमा पार करते एक लहूलुहान महिला से  दो बार बलात्कार करने वाला और उसके यौनांगों मे लोहे की राड डालने वाला आरोपी मुस्लिम था फिर भी उसके साथ बलात्कार करने वाले 5 आरोपी हिन्दू थे ॥ मेरा प्रश्न यही है की हिन्दू बहुल हिंदुस्तान मे हिंदुओं मे ये पाशविकता कहाँ से आ रही है ? ये वही हिन्दू धर्म है जिसमे नारी को शक्ति का रूप माना जाता है “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता".. 
दरअसल समस्या भी यही से शुरू होती है मेरे समझ से नर और मादा मे स्वाभाविक लैंगिक आकर्षण होता है चाहे वो जानवर हो या मनुष्य तो फिर हम जानवरो से पृथक कैसे हुए। जानवरो से पृथक करते हैं हमारे संस्कार । संस्कार कहाँ से हमे मिलते हैं तो संस्कार हमे धर्म से मिलते हैं चाहे वो हिन्दू हो मुसलमान हो ईसाई ,पारसी या जैन हो ॥ जैसे जैसे धर्म का लोप होता है उस धर्म के संस्कारों का भी लोप होता है । और इसी के बाद मनुष्य अपनी मर्यादा भूलकर एक श्रेणी नीचे खड़ा हो जाता है और जानवरों की भाति यहाँ वहाँ भटकने लगता है । अगर आंकड़ों पर गौर करे तो पिछले दो दसक मे यौनजनित अपराधों की बाढ़ सी आ गयी है। तो क्या बदलाव आया हमारे समाज मे इन दो दसको मे?? यदि आप मैकाले को जानते हो तो उनकी दो सौ साल पहले  ब्रिटेन की संसद मे हिंदुस्थान के खिलाफ बनाई गयी योजना का कार्यान्वयन हुआ है । जैसा की पहले भी मैंने कहा है की अंग्रेज़ नारी को उपभोग की वस्तु से ज्यादा कुछ नहीं समझते अपने व्यापारिक और धार्मिक हितो के लिए यूरोप ने एक कार्यक्रम चलाया  जिसके दो लक्ष्य थे प्रथम –हिंदुस्थान को ईसाई राज्य बनाना दूसरा-हिंदुस्थान से हिन्दुत्व की अवधारणा को खतम करना। इसी के प्रथम कड़ी के तहत उन्होने बौद्धिक रूप से अंग्रेज़ हिंदूस्थानियों का एक वर्ग तैयार किया और उनके हाथ मे सत्ता सौप दी खुद वापस लौट गए । उनके इस कार्यक्रम मे इस्लामिक कठमुल्लों,कमुनिस्टो एवं हिन्दू धर्म के कैंसर सेकुलर गद्दारो ने खाद पानी का प्रबंध किया। इसी कार्यक्रम के अंतर्गत धीरे धीरे नारी को एक उपभोग की वस्तु के रूप मे समाज मे अवस्थित किए जाने लगा,ठीक उसी समानान्तर क्रम मे सुनुयोजित तरीके से हिन्दू धर्म संस्कारों का ह्रास किए जाने लगा ।
ये वही हिंदुस्थान है जिसकी मिट्टी मे कभी रानी लक्ष्मीबाई जैसी वीरांगना ने जन्म लिया और नारीशक्ति का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया मगर आज परिस्थितियाँ बदली हुई है आज हिंदुस्थान की नारी सती सावित्री और लक्ष्मीबाई जैसे विशेषणों से अपने आप को अपमानित महसूस करती है और मेडोना और स्पाइस गर्ल उसकी पसंद बन गए हैं। आज का हिन्दुस्तानी युवा भगत सिंह और सावरकर को भूल के माइकल जैकसन,रिकी मार्टिन,शाहरुख खान मे अपना आदर्श ढूँढता है। उसे ये बताया गया की वेदों की ऋचाए बकवास है और माइकल जैकसन के गाने जीवन का लक्ष्य। सेक्स और अतृप्त लैंगिक इच्छाओं की की पाशविक रूप से पूर्ति करने का उद्देश समाज की नसो मे टेलीविज़न और संचार माध्यमों से भरा जा रहा है फिर हम कहते हैं की बलात्कार क्यू हो रहा है ??
कुछ तथाकथित बे सिर पैर की बाते करने वाले बुद्धिजीवी ये बकवास कर सकते हैं की क्या समस्या है पाश्चात्य सभ्यता मे वो भी एक जीवन पद्धति है ?? जी हाँ मुझे कोई समस्या नहीं मगर हर पद्धति की कुछ अच्छाइयों के साथ साथ बुराइयाँ भी नकारात्मक पार्श्व प्रभाव के रूप मे आती हैं। हमने यूरोप से नग्नता ले ली मगर हम भूल गए की यूरोप मे शिशुमंदिरों की तरह गर्भपात केंद्र भी खुले हैं। ये उनकी सभ्यता है की एक व्यक्ति कई महिलाओं के साथ सेक्स संबंध रखता है और इसे कोई बहुत बुरा नहीं कहता उनकी सभ्यता मे खुलापन होने के कारण सेक्स आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए किसी महिला का आसानी से मिल जाना समान्य बात है। महिलाएं भी एक से ज्यादा पुरुषों के साथ संबंध रख सकती है । हमारे हिंदुस्थान मे सेक्स आवश्यकताओं का उद्दीपन या आवश्यकताओं को पाशविक रूप से उभरने के सभी साधन यूरोप से ला के भर दिये गए मगर पाशविक सेक्स आवश्यकताओं की पूर्ति का कोई तरीका नहीं है क्यूकी यहाँ यूरोप की तरह हर चौराहे पर लड़की नहीं मिल सकती सेक्स के लिए , न ही यहाँ यूरोप की तरह जानवरो के साथ सेक्स करना स्वीकार्य है और जब एक बार मनुष्य मनुष्यता को त्याग कर जानवर बन गया फिर उसे माँ,बहन,बेटी या राह चलती लड़की एक उपभोग की वस्तु से ज्यादा कुछ नहीं नजर आएगी और उसकी परिनीति होती है वीभत्स कुकर्म बलात्कार के रूप मे॥ वस्तुतः ये असर है अधकचरी सभ्यता का हम नंगे घूमना चाहते हैं मगर कोई हमारी ओर न देखें ,हमने हर चौराहे पर दारू के अड्डे बना दिये मगर कोई भी गाड़ी शराब पी के न चलाये ऐसा चाहते हैं।
पाश्चात्य सभ्यता ने जो नग्नता परोसी है उसमे हर नौजवान के केन्द्रबिन्दु मे सेक्स होता जा रहा है और उसकी परिधि मे है भोग्या बना दी गयी नारी का वक्र और भूगोल । किसी भी एक घटना के लिए हम सिर्फ एक ही विचार या परिस्थिति को कारण नहीं बना सकते उसी प्रकार बलात्कार के लिए भी कई कारण उत्तरदाई है।उसमे धर्म से विमुख ,चरित्र से गिरे हुए, पथभ्रष्ट किए जा रहे भारतीय युवको का आत्मनियंत्रण खोना प्रमुख है। साथ ही साथ उसमे हमारी बहनो के पाश्चात्य परिधान चयन, सेक्स की इस आग मे वासना के घी का कार्य करता है। आप ही बताये एक महिला जब ऐसी जींस पहनती है जो उसके कमर के नीचे तक हो और उसमे उसके अंतःवस्त्र दिखते हो तो उस पर चरित्रहीन को तो छोड़िए समान्य व्यक्ति की क्या प्रतिक्रिया होगी? जब ब्रा और पैंटी मे नितंबो,कूल्हों , और यौनांगों का बेहूदा भौड़ा प्रदर्शन एक महिला करे तो उस पर आपत्ति क्यू न की जाए? लक्ष्मणरेखा तो खिचनी ही होगी इसे नंगा नाचने वाले मोरल पुलिसिंग का नाम दे तो यही सही। मगर ये नंगा नाच जब तक चलेगा तब तक कुछ हद तक महिलाएं भी अपनी उत्तरदायित्व से नहीं बच सकती । कुछ बाते जरा खुले रूप से लिखनी यहाँ जरूरी थी ॥ जहाँ इज्जत या मर्यादा की बात होती है ,वो महिला की ओर इंगित की जाती है कारण ये है की महिला प्राकृतिक रूप से इज्जत का प्रतिनिधित्व करती है।  चाहे वो जानवरो मे हो या इन्सानो मे । इसे किसी धर्म ने नहीं बनाया है अतः शील की रक्षा के एक कदम आगे आ के कार्य करना महिलाओं का भी कर्तव्य बनता है.  चाहे वो यौनांगों का कम से कम प्रदर्शन हो या किसी वाहियात इज्जत पर हाथ डालने वाले के खिलाफ प्रतिक्रिया करना।  आज पूनम पांडे और सन्नी लियोन जैसी वेश्या हमारे बेडरूम मे टीवी के माध्यम से पहुच चुकी है और बात सभी लोग आदर्शो की कर रहे हैं। जरा इन महिलाओं को देखें अब महिला आयोग और बुद्धिजीवी कहेंगे की मेरी नजर खराब है तो जी हाँ मुझे वही दिख रहा है जो ये दिखा रहे हैं । और तो और रेप का कैसे विरोध हो रहा है ये भी देखें।

हाँ मगर उसी प्रकार से युवको के लिए भी सीमा रेखा का निर्धारण करना होगा क्यूकी एक सत्य ये भी है की साड़ी पहनी हुई महिला या 2 माह की बच्ची से भी बलात्कार होता है ये इंगित करता है, पश्चिमी पाशविक मानसिकता का ॥ अभी रूस ने अमरीका के लोगो को रूसी  बच्चो को नौकर के रूप मे रखने के खिलाफ एक कानून बनाया है मूल यही है की वो लोग इतने पाशविक हो गए हैं की बच्चो को भी अपनी हवसपूर्ति का साधन बनाने लगे हैं वही हमारे समाज मे भी लाया जा रहा है यूरोपियन संस्कृति के साथ॥ 
 आज कल के युवा अमरीकन मानसिकता के साथ इंडिया गेट पर मोमबत्ती जलाके शाम को पब मे रात भर के लिए गर्लफ्रेंड ढूँढते हैं।  इस प्रकार हम एकतरफा महिला को दोष देकर अपने जबाबदेही से नहीं बच सकते ।एक उदाहरण देता हूँ जो की समान्य व्यक्तियों पर लागू है ढोंगी आदर्शवादियों और जानवरो पर नहीं । जब हम एक देशभक्ति सिनेमा देखते हैं तो देशभक्ति के भाव आता है मन मे, जब एक दुखद दृश्य देखते हैं तो दुख का भाव ,जब हसी देखते हैं तो हास्य का भाव आता है और कभी कभी वो तात्क्षणिक रूप से हमारे जीवन मे परिलक्षित होता है जैसे एक दुखद दृश्य के बाद रोते हुए लोग या एक हास्य के बाद ठहाके लगाते लोग। तो रोज नए नए विज्ञापनो से गानो से पिक्चरों से रंडीबाजी (यही उचित शब्द है) देखते देखते क्या इसका कोई अनुकरण नहीं करेगा॥ 
डियो लगाओ लड़की आप के बाहों मे
,चाकलेट खाओ लड़की पटाओ,बाइक लाओ लड़की पटाओ,साबुन बेचने के लिए लड़की को नंगा करो ,कंडोम बेचने के लिए लड़की को नंगा करो मतलब हर जगह महिला को नंगा करके हिंदुस्थान की नयी पीढ़ी को मानसिक रूप से बीमार सेक्स रोगी बना दो। हर विज्ञापन मे सेक्स परोसते लोग। जरा सोचिए ये सब जब एक बच्चा जन्म से 16 साल तक लगातार रोज रोज देखेगा तो होश संभालने के बाद अपनी सेक्स की आवश्यकता पूर्ति कैसे करेगा? जी हाँ वो एक पढ़ा लिखा मानसिक रूप से बीमार रोगी बन जाता है और जब संदर्भ हमारे समाज का हो जो न तो पूरी तरह हिंदुस्थानी विचारधारा छोड़ पाया न ही पूरी तरह अंग्रेज़ बन पाया, तो स्थिति और भी भयावह। एक विवेकानंद ने अकेले शिकागो ने हिंदुस्थान का झण्डा सर्वोपरि रक्खा क्यूकी उनके आदर्श थी वेद की ऋचाएं,गीता के श्लोक, और रामचरितमानस की चौपाइयाँ ॥ आज के युवाओं के कुछ आदर्श मंत्र जो दिन मे कई बार दोहराए जाते हैं और कंठस्थ है, 
कभी मेरे साथ एक रात गुजार, मै हूँ तंदूरी मुर्गी यार गटकाले मुझको अल्कोहल से , तू चीज बड़ी है मस्त मस्त,चोली के पीछे क्या है,शीला की जवानी, मै शराबी  मै शराबी .....अब जब चोली के पीछे पीछे गाते गाते लाखो लोगो मे से एक ने इस गाने को प्रयोगात्मक रूप दे दिया तो हो गया हंगामा ॥ 
 ये सिर्फ एक बानगी भर है। आज कल टीवी चेनेल कामक्रीड़ा को भी दिखाने लगे हैं और वो हम सब मजे से देखते हैं फिर इतना हँगामा क्यू बरपा है?? जिस हिसाब से हमारे हिन्दुत्व के संस्कारो का दमन और नग्नता की आँधी चल रही है उस संदर्भ बिन्दु से देखें तो ये घटनाएँ कुछ भी नहीं हैं यहाँ तो त्राहि त्राहि होना चाहिए॥ अगर अभी कुछ बचा है वो इसलिए क्यूकी ये संस्कार धीरे धीरे आते हैं और धीरे धीरे ही जाते हैं उल्टी गिनती शुरू हो गयी है यदि हम अब भी नहीं चेते तो सिर्फ दो ही रास्ते बचते हैं पूरी तरह यूरोपियन जानवर बने औ“सेक्स किसी के साथ, कभी भी, कहीं भी” को स्वीकार करे या यूरोपियन भारतीय संस्कारों का वर्णसंकर बनना है तो इंडिया गेट पर एक मोमबत्ती का कारख़ाना खुलवाने के लिए सरकार अर्जी दे दीजिये ...
हाँ एक और तरीका है जो बुद्धिजीवियों के गले न उतरे न ही तथाकथित अङ्ग्रेज़ी के गुलाम,सेकुलर और कमुनिस्ट द्रोही इसे स्वीकार कर पाये आइये एक बार फिर हिन्दुत्व की शरण मे चलते हैं कम से कम हिन्दुत्व मे शिवाजी विवेकानंद और रानीलक्ष्मीबाई के प्रमाण है न की विभिन्न  देशों की वेश्याओं को को सिरमौर बनाने के...
निर्णय आप का ॥
जय श्री राम

लेखक : आशुतोष नाथ तिवारी 



शुक्रवार, 4 जनवरी 2013

रक्तबीज,लाल सलाम और माओवाद


आदि-शक्ति देवी दुर्गा  की पौराणिक कहानियों के एक दानव की कहानी बहुत प्रसिद्द है.उस दानव का नाम था रक्त बीज. इस दानव को मारना असंभव सा हो गया था क्योंकि जैसे ही कोई उस दानव पे हथियार से वार करता, दानव के ख़ून की एक एक बूँद से नया दानव बन जाता था.
बिलकुल ऐसा ही एक रक्तबीज फिर से हमारे समाज में लाल रंग के साथ फैला जा रहा है.
राजनीति की भाषा में उस दानव को नक्सलवाद कहते हैं.

सरकार की अपनी राजनितिक मजबूरियों के कारण उस पे हथियार-प्रयोग के अलावा और कोई रास्ता नहीं अपना सकती.
सेक्युलरवाद का प्रदर्शन करने वाली सरकार कभी भी वामपंथ (Left Wing) के प्रति कोई विनम्रता नहीं दिखा सकती. बार बार इन माओवादियों के खिलाफ सेना को लड़ने के लिए भेजा जाता है. सेना उनपे बंदूकें चलाती है और परिणाम क्या निकलता है- ये दानव और बढ़ जाता है. और सैनकों व पुलिस के जवानों को शहीद होना पड़ता है. सचमुच ये एक रक्तबीज है जितना काटोगे उतना बढेगा

आज 300 से ज्यादा जिले नक्सलवाद की हिंसा में जल रहे हैं. आखिर ये लाल रंग की हिंसा, गांधी के देश में आई कहाँ सेक्या होता है नक्सलवाद? क्या होता है माओवाद ? किसे कहते हैं वामपंथी?
इस सवाल का जवाब ढूंढने के लिए हमें इतिहास में बहुत पीछे जाना होगा.



17 वीं सदी में जब महान वैज्ञानिक जेम्स वाट ने भाप के इंजन का अविष्कार किया था तब दुनिया में एक क्रांतिकारी बदलाव आया।
और यहीं से मशीनी युग की शुरुआत हुयी. मशीनी युग के आते ही समाज दो भागों में बंट गया- 1.पूंजीपति वर्ग (Capitalist Class ) और
2.मजदूर वर्ग ( Labor Class )

फैक्ट्रियों से होने वाले बड़े मुफाफे को फिर से नयी फैक्ट्रियों में लगा देने से पूंजीपति वर्ग और अमीर होता चला गया.
मशीनों से बने सामान बहुत सस्ते और अच्छी गुणवत्ता के होने के कारणहाथ से बने सामानों की बिक्री ख़त्म हो गयी, मजदूर वर्ग और गरीब होता चला गया.





एक तरफ लोगों के हाथ से काम छीन गया और दूसरी तरफ पूंजीपतियों के पास प्रकृति के सभी संसाधनों पे कब्ज़ा करने की ताकत आ गयी.
पूंजीपति वर्ग का ताकतवर हो जाना गैर कानूनी नहीं था, लेकिन किसी एक व्यक्ति के द्वारा पैसों की ताकत से, सारे संसाधनों पे कब्जा कर लेना, जहां दुसरे लोग भूख से मर रहे हों, मानवता की दृष्टि में बिलकुल भी न्यायसंगत नहीं था.



समाज में पैदा हुयी इस दुविधा का हल किसी को नहीं दिखाई दे रहा था. समाज निराशा में डूब गया, वो इस बात से बेखबर था कि अचानक ही करिश्मे का जन्म होने वाला है.
उस करिश्मे का नाम था - कार्ल मार्क्स.




मार्क्स के अनुसार प्रकृति के सभी संसाधनों पे सारे मानवों का बराबर अधिकार है.
कैपिटलिज्म के विरोध में पैदा हुयी ये नयी विचारधारा कम्युनिज्म (कम्युनिस्ठवाद) के नाम से प्रसिद्द हुयी.
पीढ़ी दर पीढ़ी मार्क्स का कम्युनिज्म एक देश से दुसरे देश में फैलता चला गया.
मार्क्स के विचारों को राजनीती में महत्व मिलने लगा.
लेकिन यथार्थ के धरातल पे कैपिटलिज्म अभी भी नहीं हारा था. पैसों की ताकत के आगे विचारों की ताकत बहुत छोटी हो जाती है.
लोगों को लगने लगा था कि कम्युनिज्म सिर्फ कलम से स्थापित नहीं हो सकता.
और इसी के साथ जन्म हुआ कम्युनिज्म की भयानक स्वरुप का- माओत्से तुंग.




चीन में जन्मे विचारक माओत्से तुंग ने कम्युनिज्म को प्रबल करने के लिए हथियार उठाने की अपील की.
माओ के अनुसार कैपिटलिस्ट लोगों की हत्या कर देना ही एक मात्र हल है.
लोगों को माओ की ये बात बहुत ही सही लगी.
माओवाद इतनी तेजी से फैला जितनी तेजी से मार्क्सवाद भी नहीं फैला था.



चीन के निकटवर्ती भारत का उत्तर पूर्व का क्षेत्र भी माओवाद की आग से नहीं बच पाया.
उड़ीसा के एक गाँव नक्सलवाड़ी में आदिवासी माओवादियों ने कई उद्योगपतियों को जिन्दा जला दिया.
ये घटना नक्सलवाद के नाम से जानी गयी. यहीं  से वो रक्तबीज भारत में फैलता चला गया.
मुझे यहाँ  पे एक पुरानी घटना याद आ रही है. जब नक्सलियों ने एक कलेक्टर का अपहरण कर लिया था. जब वो कलेक्टर रिहा हो के आये तब स्वामी अग्निवेश ने उनसे पूछा- "आपको वहाँ किस तरह रखा जाता था ?"कलेक्टर ने जवाब दिया- "जैसे मैं अपने घर पे रहता हूँ, मुझे वहां भी वैसे ही रखा जाता था, सभी लोग मुझसे दोस्तों की तरह बात करते थे, साथ बैठ के खाना खाते थे और किसी तरह की कोई तकलीफ नहीं होने देते थे.एक नक्सलवादी भी आम आदमी होता है. उनका मकसद सिर्फ नरसंहार करना नहीं है.





पौराणिक दानव रक्तबीज की समस्या को देवी दुर्गा ने अच्छी तरह समझ लिया था और उसका सही समाधान निकाल लिया था.
उम्मीद है आने वाले समय में हमारी सरकार रक्तबीज पे हथियार उठा कर उसे और विकराल बनाने कि बजाये कोई समझदारी का कदम उठाएगी.



ये समस्या उतनी बड़ी नहीं जितनी हमने बना दी है, वो समय भी आएगा जब पूंजीवादी-अन्याय का हल, नक्सलवाद न हो कर कोई संवैधानिक और मानवीय तरीका होगा.


















लेखक:दिव्य प्रकाश श्रीवास्तव