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बुधवार, 21 नवंबर 2012

डेंगू और कांग्रेसी इच्छाशक्ति के बीच झूलती कसाब की फाँसी




आज सुबह अजमल आमिर कसाब को फांसी दे दी गयी ॥ सभी हिंदुस्थानियों के लिए खुशी की मगर अप्रत्याशित खबर और पिछले 8 साल के कांग्रेस शासन की सबसे अप्रत्याशित खबर । हालांकि  मुंबई पर हमलावर के लिए ये सजा कोई अप्रत्याशित नहीं थी मगर अप्रत्याशित है फाँसी देने का समय । गुजरात चुनावों मे 1 महीने का भी समय नहीं बचा है । और ये बात पूरी तरह से काही जा सकती है की कहीं न कहीं कांग्रेस सरकार के नीति निर्धारक अफजल और कसाब के मुद्दे पर चुनावो से पहले हाथ डालकर कोई नया प्रयोग नहीं करना चाहते होंगे।  इसलिए भी फाँसी की टाइमिंग पर सवाल उठने लाज़मी है । कुछ दिनो पहले खबर आई थी की कसाब को डेंगू है ।दबे जबान मे ये बाते भी उठने लगी है कसाब डेंगू से मरा सरकार ने इज्जत बचाने के उद्देश्य से आनन फानन मे इसे फाँसी मे तब्दील कर दिया । कुछ विचारणीय है की महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री  के अनुसार कसाब को यरवडा जेल में ही दफना दिया गया मगर जेल मैन्युएल के अनुसार उस धर्म का कोई धर्मगुरु फाँसी देने के बाद अंतिम क्रिया के समय उपस्थित रहना चाहिए ध्यान रहे ओसामा को दफनाने की खबर मे भी ये ध्यान रखा गया था मगर भारत सरकार की जल्दी का कारण क्या था ? फाँसी की सजा की रेकार्डिंग(फाँसी होने के पूर्व तक की) या कोई अन्य साक्ष्य भी जारी नहीं किए गए जिससे पता चले की कसाब को फाँसी ही हुई है । इन सारे सवालो से बचने के लिए सरकार को कसाब के फाँसी के पहले तक की रेकार्डिंग सार्वजनिक करनी चाहिए । जो कांग्रेस अफजल गुरु की फाँसी पर चीख चीख कर बोलती थी की राष्ट्रपति के पास फाँसी की  दया याचिका क्रमानुसार भेजी जाएगी इसलिए अफजल को अभी फाँसी नहीं दे सकते उसी कांग्रेसी गृहमंत्रालय ने अचानक आखिरी नंबर के कसाब को पहले नंबर पर क्यू रखा?? इधर कसाब का वकील ने प्रश्न उठाया है जी इसकी जानकारी उसे नहीं दी गयी॥ ऐसे सारे कई प्रश्न है जिसका जबाब आने वाले भविष्य मे कांग्रेस सरकार को देना पड़ेगा ।
प्रश्न ये भी है की सिर्फ कसाब की फाँसी ही काफी है मुंबई के गुनहगारो को सजा देने के लिए । कसाब एक  मोहरा था आईएसआई और उसके गुर्गों का ॥बाकी मास्टरमाइंड पर कोई कार्यवाही करने मे भारत सरकार सफल होगी या डोजीयर के आदान प्रदान करके कर्तव्यों की इतिश्री कर लेगी । एक ओर जहां इज़राइल जैसा छोटा सा देश घर मे घुसकर हर कीमत पर अपने नागरिकों की हत्या का बदला लेता है हमारी कांग्रेस सरकार पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के साथ ट्वेन्टी ट्वेन्टी खेलने मे व्यस्त है ॥
यदि ये तथकथित फाँसी सही मान भी ली जाए तो इसे कांग्रेस की इच्छाशक्ति से ज्यादा मजबूरी कहा जा सकता है ,वैसे भी सरकार की साख गिर रही है 26/11 की चौथी बरसी से पहले कसाब को लटकाकर कांग्रेस अपने बिखरते हुए अस्तित्व को बचाने का एक आखिरी प्रयास कर रही है ॥
 हम ये कैसे भूल सकते हैं की जिन शहीदो ने अपनी जान दे कर भारतीय संसद और संसद के कर्णधारो की रक्षा की थी उनकी हत्या करने वाला अफजल अब भी जेल मे मजे से बिरयानी का आनंद ले रहा है और पिछले कई सालो से कांग्रेस ने मुस्लिम वोटो की खातिर उसे खुलेआम संरक्षण दे रखा है । इस तथाकथित फाँसी के घटनाक्रम से अब पाकिस्तान मे हिंदुस्थानी कैदी “सरबजीत सिंह” को जल्द से जल्द फाँसी देने की मांग उठने लगेगी और इसमे संदेह नहीं की पाकिस्तान अपनी जन्मजात मक्कारी दिखते हुए सरबजीत को फाँसी दे कर कसाब की फाँसी का जबाब दे ।
बहरहाल डेंगू और कांग्रेसी इच्छाशक्ति के बीच झूलती कसाब की फाँसी का ये समय  मुंबई हमलो मे बलिदान हुए लोगो और उनके परिवार वालों समेत समस्त हिंदुस्थानियों को शांति और खुशी देने वाला है और दिग्विजय सिंह जैसे नेता के मुह पर एक करारा तमाचा जिसके अनुसार इन हमलो मे आरएसएस जैसे राष्ट्रवादी  संगठन का हाथ था ॥

जय श्री राम

सोमवार, 19 नवंबर 2012

हिंदुस्तान की तबाही कर देंगे : अकबरुद्दीन ओवैसी

मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एमआईएम) के नेता अकबरुद्दीन ओवैसी ने खुलेआम  धमकी दी है की यदि मुसलमानो की बात नहीं मानी गयी तो हिंदुस्थान को तबाह कर देंगे ॥ कांग्रेस सरकार सर्वदा की तरह मौन ॥
पूरा विडियो देखें॥ 

 Hyderabad MLA Akbaruddin Owaisi threats to destroy India ...



रविवार, 18 नवंबर 2012

नहीं रही अब सिंह गर्जना - बाला साहेब ठाकरे को श्रद्धांजलि

बाला साहेब ठाकरे अब हमारे बीच नहीं रहे। ये खबर अप्रत्याशित तो नहीं मगर फिर भी  ये खबर सुनकर ऐसा लगा जैसे बरसों से खड़ा वटवृक्ष जिसकी छाया मे हजारो लोग पले बढ़े वो अब नहीं रहा। शायद प्रथम बार किसी राजनेता की मृत्यु पर आम जनमानस के आँसू निकले॥ क्यूकी शायद तमाम विवादों के बाद भी बाला साहब को लोग एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप मे देखते थे जिसकी कथनी और करनी मे कोई अंतर नहीं रहा॥ बात 1960 के दशक की है जब बाला साहब ने फ़्री प्रेस जर्नल की कार्टूनिस्ट की नौकरी छोड़ कर अपने पत्र "मार्मिक" के माध्यम से सक्रिय रूप से सामाजिक मे कदम रखा ॥ ये दौर  तब श्रीमती इन्दिरा गांधी और मजबूत होते मजदूर यूनियन का था ॥ तब किसी ने नहीं सोचा था की आर के लक्ष्मण के साथ बैठ कर कार्टून बनाने वाला ये दुबला पतला व्यक्ति हिंदुस्थान की राजनीति और हिन्दुत्व की विचारधारा मे एक ऐसी अमित छाप छोड़ जाएगा जिसे उसके जाने के बाद भी नजरंदाज करना संभव नहीं होगा। "आम मराठी मानुष"के मुद्दे से राजनीति शुरू करने वाले ठाकरे की आलोचना एक क्षेत्रवादी नेता के रूप मे अक्सर होती रही है मगर इस आलोचना के पीछे कहीं न कहीं ठाकरे की स्पष्टवादिता रही है ॥ वो जैसे थे वैसे ही दिखते थे वैसा बोलते थे ॥ शायद आज कल के राजनीतिज्ञों की तरह दोगला चरित्र  उनके पास नहीं था और यही कारण है की आप उन्हे या उनकी विचारधारा के समर्थक या विरोधी हो सकते हैं उन्हे नजरंदाज नहीं कर सकते ॥क्षेत्रवाद की राजनीति का आरोप लगाने से पहले हमे वर्तमान राजनीति का समीकरण समझना होगा जो इससे भी एक सीढी नीचे गिर गया है वो है "जातिगत राजनीति" । हम भले ही एक राज्य मे हो मगर क्या आज हम आपसा मे जातिगत तौर पर नहीं बटे हैं?

क्या दोगली बाते करने वाले राजनेता हमे जतियों मे नहीं बाटते इस जातिगत विभाजन के शुरू से ही विरोधी रहे बाला साहेब॥''मराठी मानुष" की राजनीति बाला साहेब की स्थानीय राजनीतिक आवश्यकता थी मगर हिन्दुत्व की विचारधारा और भगवा ध्वज के प्रति समर्पण  उनका व्यक्तित्व था ,यही कारण है की आज उत्तर भारतीय हो या दक्षिण का हिन्दू बाला साहेब का जाना उसके लिए एक व्यक्तिगत क्षति है ।
सामना अखबार के माध्यम से अपने विचारो को आम मराठी मानुस  तक रखने वाले बाला साहेब ने हिंदीभाषियों से संपर्क बनाने के लिए "दोपहर का सामना" नाम का हिन्दी अखबार भी निकाला॥ बाला साहेब एक ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्होने अपने मनोभावों को शत प्रतिशत अपने वक्तव्यों मे पिरोया था फिर चाहे इन्दिरा गांधी का समर्थन हो ,वाजपेयी का विरोध या हिटलर के भाषणो की प्रसंशा॥
बाबरी मस्जिद गिरने के बाद जब हर कोई ,चाहे वो भाजपा के राष्ट्रवादी नेता हो या संघ के संचालक, इससे अपने आप को अलग कर रहा था "तब इसी हिन्दू शेर की ये दहाड़ थी की ये काम मेरे शिवसैनिको का है और मुझे गर्व है इस पर"॥ ये वक्तव्य किस क्षेत्रवाद का समर्थन करता है ?? बाबरी ढांचा उत्तर भारत मे था और ठाकरे मुंबई मे ॥ जब अमरनाथ यात्रा पर जेहादियों ने धमकी दी तो कश्मीर मे उनकी औकात बताने के लिए कोई हिन्दू वीर सामने आया तो बाला साहेब ॥ कभी किसी पद की इच्छा न रखते हुये हिंदुओं के हृदयरूपी सर्वोच्च पद  पर बैठने वाले बाला साहेब का ये था असली व्यक्तित्व।
बाला साहेब हमारे बीच रहे या न रहे हिंदुओं की अस्मिता के पुनर्जागरण का अभियान चलाने वाला ये हिन्दू शेर और उसका आह्वान "गर्व से कहो हम हिन्दू है ,सर्वदा हमारी अंतरात्मा की आवाज रहेगा और बाला साहेब की हिन्दू हृदय सम्राट की छवि सभी राष्ट्रवादियों के हृदय मे अमित है...
भावभीनी श्रद्धांजलि ॥

बाला साहब की यात्रा मे उमड़ा जन सैलाब और वीरान रुकी हुई मुंबई....जो कभी नहीं रुकती थी॥ 
 


खाली स्टेशन
वीरान मुंबई 




आशुतोष की कलम से ... 

शनिवार, 17 नवंबर 2012

हैदराबाद दंगो के लिए कांग्रेस जिम्मेदार: अकबरुद्दीन ओवैसी

मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एमआईएम)  के नेता अकबरुद्दीन ओवैसी ने हैदराबाद पुलिस पर पत्थरबाजी का आरोप लगाया है। संवाददाताओं से बात करते हुई अकबरुद्दीन ओवैसी ने कहा की सादे मुस्लिम कपड़ों मे पुलिस के लोग  ने दंगा किया न की उनके मुस्लिम कार्यकर्ताओं ने।

ओवैसी के अनुसार पत्थरबाजी की घटना मे आधे पत्थर पुलिसवालो ने खुद ही चलाये हैं।

ओवैसी ने कांग्रेसी नेता एवं आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन किरण कुमार रेड्डी को इन दंगो के लिए जिम्मेदार ठहराया है । ओवैसी के अनुसार राज्य की कांग्रेस सरकार मुस्लिमो को प्रताड़ित कर रही है और वो इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठने वाले हैं।
सूत्रों से मिली खबरों के अनुसार अकबरुद्दीन ओवैसी  और उनके पार्टी नेतों ने एक धार्मिक बैठक मे ये वक्तव्य दिया की “ यदि मुसलमानो को 1 घंटा मिल जाए तो महालक्ष्मी मंदिर का नामो निशान मिटा दिया जाएगा"।
ज्ञातव्य हो की ओवैसी कुछ दिनो पहले तक इसी सरकार का हिस्सा थे। अभी उनके इस कदम को आंध्र के नेता जगनमोहन रेड्डी से नए गठजोड़ के रूप मे देखा जा रहा है ॥ दीपावली पर हिंदुओं को मंदिर सजाने की अनुमति दिये जाने के मुद्दे पर मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एमआईएम)  ने  कांग्रेस से समर्थन वापस ले लिया था । हलाकी कांग्रेस ने मुस्लिम अल्पसंख्यक कल्याण बजट 30 करोड से बढ़ाकर 500 करोड करके ओवैसी से गठबंधन बनाए रखने का प्रयास किया मगर जगन की बढ़ती लोकप्रियता और दीपावली पर हिंदुओं को मंदिर सजाने की अनुमति दोनों मुद्दो को देखते हुए ओवैसी  ने ये नया राजनीतिक दाव खेला है ॥

हैदराबाद मे पुनः दंगे/hyderbaad riots

पुराने हैदराबाद मे शुक्रवार को नमाज के बाद मुसलमान समुदाय पुनः हिंसक हो उठा । मक्का मस्जिद मे जुमे की नमाज के बाद मुस्लिम प्रदर्शनकारियों ने गाड़ियों को फूँक  दिया और पुलिस पर हमला बोल दिया।  पास मे बने मंदिर की ओर मुस्लिम दंगाइयों ने हमला किया और आस पास के  वाहनो को फूंकना शुरू किया । स्थिति को बिगड़ता देख अर्धसैनिक बलो ने मोर्चा संभाला मगर हिन्दू समुदाय की दुकानों और वाहनो पर हमला जारी रहा। कई गाडियाँ फुकने के बाद कश्मीर की तर्ज पर हैदराबाद मे भी पत्थबाजी का खेल शुरू हो गया है । चारमीनार और मस्जिद के हर तरफ से पथराव किया जा रहा है और मुस्लिम प्रदर्शंकारी पथराव करके मस्जिद मे छिप जाते हैं। स्थिति को नियंत्रण मे करते समय मुस्लिम दंगाइयों के हमले मे कई पुलिसवाले घायल हुये है पुलिस को मुस्लिम प्रदर्शनकारियों पर गोली न चलाने की सख्त हिदायत है अतः पुलिस और अर्ध सैनिक बल के जवान आँसू गैस के गोले एवं लठियों से व्यवस्था बनाने का प्रयत्न कर रहे हैं। चार्मिनार के आस पास पुलिस का पहरा सख्त देखते हुए मुस्लिम दंगाई सैयद ली चबूतरा,मोघलपुरा ,रेनबाजार,तालाबकट्टा ,याकूतपुर,पंजेशाह,और  इथेबर चौक की ओर भाग गए और वहाँ तेज पत्थरबाजी और गोलाबारी की।


ज्ञातव्य है की मुस्लिम समुदाय पूजा के लिए हिंदुओं द्वारा चारमीनारसे सटे  मंदिर के ऊपर पांडाल लगाने को लेकर खफा है,और उसके विरोध मे हिंसक प्रदर्शन कर रहा है । राज्य  के मुस्लिम संगठन और राजनीतिक पार्टी मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एमआईएम) का कहना है की हिंदुओं की मनमानी हैदराबाद मे नहीं चलेगी। । राज्य की गृह मंत्री सबिता इंद्रा रेड्डी ने सभी लोगो से शांति बनाए रखने की अपील की है । सबिता इंद्रा रेड्डी के अनुसार स्थिति तनावपूर्ण किन्तु नियंत्रण मे है। पुलिस कमिश्नर अनुराग शर्मा ने दंगाइयों पर सख्त कार्यवाही करने की बात की है । बड़ी संख्या मे पुलिस और अर्धसैनिक बलो  के जवान इलाके मे गस्त कर रहे हैं। 
केंद्र सरकार के अंतर्गत आने वाले ASI(भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) ने मुस्लिम दंगाइयों के दबाव मे आते हुए मंदिर का काम तत्काल प्रभाव से बंद कराने के लिए स्थानीय पुलिस को संपर्क  करने का निर्णय लिया है।