रविवार, 23 दिसंबर 2012

प्रायोजित कार्यक्रम बना जनांदोलन -कांग्रेस की मिसाईल बैकफायर



पिछले दिनो दिल्ली मे हुये जघन्य बलात्कार की घटना  बाद सर्द दिल्ली की फिजा मे अचानक ही उबाल सा आ गया। बच्चे बूढ़े महिलाएं सब सड़क पर आ गए। जिस प्रकार उस महिला के साथ वीभत्स तरीके से बलात्कार के बाद क्रूरता की हदे पार कर दी गयी उसके सामने एक बार पशुओं का आचरण भी कम लगे । उस दिन के बाद सड़क से संसद तक इसकी गूंज सुनाई देती रही और अचानक ही पूरे भारत मे इसके खिलाफ एक माहौल सा बना और प्रदर्शनकारी राजपथ,दस जनपथ,इंडिया गेट और जंतर मंतर पर  डट गए।
दिल्ली पुलिस वीरता दिखाते हुए
यहाँ एक बात जो निर्विवाद है वो की ये घटना निंदा की पराकाष्ठा की सीमा तक निंदनीय है मगर अचानक इतना उबाल कहा से आया पूरे देश मे ये एक विचारणीय प्रश्न है ??  क्यूकी आज के पहले भी जघन्य बलात्कार और उसके बाद हत्याएँ हुई है जिसमे 3 महीने की बच्ची से लेकर  80 साल की औरत के साथ भी ये घटनाएँ हुई मगर तब ये हिंदुस्थान क्यू नहीं जागा?? और इस बलात्कार के बाद भी दिल्ली मे एक विदेशी महिला के साथ गैंगरेप और दो बलात्कार हो गए मगर उसपर बोलने वाला कोई नहीं है ।
ये बात तो सत्य है की पिछले कुछ जनांदोलनों से सरकार के समझ मे आ गया है की जनता की भावनाओं मे उबाल है और जरा सी चिंगारी को जंगल की आग बनाया जा सकता है और इस आग मे घी का काम मीडिया और एनजीओ कर सकते हैं ॥ अन्ना और बाबा रामदेव के आंदोलन मे सरकार ने इसका नमूना देख लिया था। कांग्रेस के प्रबन्धक ये अच्छी तरह से जानते हैं की मीडिया की सहायता से जनता का के गुस्से और भावनाओं का कैसे दोहन करना है। इस बलात्कार के समय ही नरेंद्र मोदी की जीत हुई और हर जगह उनकी चर्चा थी । कांग्रेस एफ़डीआई,कोयला से लेकर आरक्षण के मुद्दे पर घिरी थी । कांग्रेस ये जानती थी की ये लहर अगर अगले 1 महीने भी चल गयी तो इसकी भारी कीमत 2014 के चुनावों मे चुकानी पड़ सकती है अतः कांग्रेस के प्रबन्धको ने हिंदुस्थान की मीडिया प्रमुख दलाली खाने वाले एनजीओऔर अपने युवा संगठनो को इस बलात्कार के खिलाफ एक जनांदोलन बनाने का  आदेश जारी किया और उसी कड़ी मे पर्दे के पीछे से कांग्रेस ने पूरे देश मे एनजीओ संठनों को वित्तीय सहायता देकर एक साथ प्रदर्शन शुरू कराये । हिंदुस्थान की गुस्से से बाहरी रोज बलात्कार और लूटमार का दंश झेलती  जनता के लिए ये एक भावनात्मक मुद्दा था और वो आ गयी सडको  पर। मिडिया को अपनी पूरी कीमत मिल चुकी थी सो उन्होने इसका जोरदार प्रमोशन किया और कुछ लोगो के मोमबत्ती जलाते जलाते हजारो लोग सड्को पर । मजबूरी मे अन्य विरोधी पार्टियां भी साथ आई शुरू मे चुप रहने वाले केजरीवाल ने भी बहती गंगा मे हाथ धोया और बाबा रामदेव भी आए ॥ 
कांग्रेस की योजना यहाँ तक सही थी मगर जनभावनाओं को उभारना शायद आसान काम है मगर काबू पाना मुश्किल। जल्दी ही कांग्रेस को समझ मे आ गया की नरेंद्र मोदी की जीत और कांग्रेस के कुकर्मों से ध्यान हटाने के लिये जनभावनाओं के ईंधन से चलने वाला "बलात्कार विरोध" का मिसाइल अब बैकफायर हो गया और जनता अब हिसाब मांग रही है बात जब तक रायसीना हिल्स की थी तब तक तो मामला सही था मगर जब आंच कांग्रेसियों के मक्का 10 जनपथ तक पहुची  तो कांग्रेस ने आनन फानन मे ये आदेश जारी किया की हर बार की तरह अब दमनचक्र चला के अब इस आक्रोश को अगले आंदोलन तक के लिये दबा दिया जाए।
इसी क्रम में महिलाओं पर बर्बर लाठीचार्ज एवं बदतमीजी भी शामिल थी . दिल्ली सरकार सोनिया गांधी और मनमोहन के आदेश पर दिल्लीपुलिस ने 7 डिग्री ठंढ मे महिलाओं पर लाठी बरसाई ,जूतों से मारा, 1 महिला पर 5 पुलिस वाले भिड़े पड़े थे ... 
कांग्रेस सरकार का आदेश पालन 
दिल्ली पुलिस वाले एक महिला को बोल रहे थे"मार साली माधरचोद रांड को" ये शब्द असभ्य हैं मगर ये है कांग्रेस की सच्चाई।  आखिर इतनी हिम्मत कैसी आई पुलिस मे??क्या ये गाली प्रियंका गांधी को पुलिस दे पाएगी?? क्या इससे महिला का अपमान नहीं हुआ ???? या जब तक किसी बहन को नंगा करके फेका न जाए तब तक वो अपमान नहीं होताअब कांग्रेस द्वारा प्रायोजित मोमबती विरोध ने दावानल का रूप ले लिया है। हालात बिगड़ता देख  10 जनपथ से अभी समचार  चैनलो को आदेश जारी किया गया की अब इसकी कवरेज बंद की जाए ।  कांग्रेस ने आखिरी पत्ता चलते हुये जाने माने क्रिकेट खिलाड़ी और कांग्रेस द्वारा मनोनीत सांसद सचिन से सन्यास की खबर को सार्वजनिक कराया ताकि मीडियाको नया मसाला मिले । सत्य ये है की सचिन ने कई दिनों पहले ही बीसीसीआई को पत्र लिख कर इस बात की घोषणा की थी। 
लेकिन कांग्रेस के सांसद और बीसीसीआई मे उचे ओहदे पर बैठे राजीव शुक्ल ने ये बात अब जाकर मीडिया मे लीक करवाई है जिससे की दुष्कर्म के गंभीर मुद्दे को दबाने के लिए सचिन के क्रिकेट से सन्यास  के मुद्दे को अच्छे से भुनाया जा सके अगर बीसीसीआई इतनी ही ईमानदार है तो सचिन का लिखा हुआ पत्र सार्वजनिक करे।
जहां तक कांग्रेस की संवेदनशीलता का प्रश्न है तो यदि सरकार इतनी संवेदनशील थी तो संसद सत्र मे बलात्कार के खिलाफ कड़े कानून  का विधेयक ला  सकती थी या संसद का विशेष सत्र बुलाया जा सकता है। मगर शाहबानों प्रकरण मे कुछ घंटो मे फैसला करने वाली सरकार आज कुछ कार्य करने की जगह लठियाँ और गोलियां चलवा रही है ।
अब भी कांग्रेस से उम्मीद रखने वालों के लिए मै कुछ  उदाहरण देना चाहूँगाआप किससे उम्मीद कर रहे हैं कांग्रेस से ???? ये वही कांग्रेस है जिसके सांसद सेक्स करने के बदले जज बनाते हैं। कांग्रेस के बुजुर्ग नेता अवैध संतानों के बाप निकलते हैं तो कोई मदेरना जैसा नेता अभिनेत्री को रखैल बना के रखता है और मन भर जाने पर हत्या कर देता है। गोपला काँड़ा और रुचिका का केस हम क्यू भूल गए???क्यूकी कांडा ने सरकार से मीडिया नेता से एनजीओ सबको मैनेज करने के लिए 1000 करोड़  खर्च कर दिया ।
राहुल गांधी पर कथित रूप से सुकन्या के बलत्कार का आरोप 
अब एक ऐसा केस जिसपर कोई बात नहीं करना चाहता । वो है सुकन्या देवी का बलात्कार ॥ कांग्रेसी युवराज के पुराने घरेलू नौकर की बेटी॥  मध्य प्रदेश के पूर्व विधायक किशोर समरीते द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया था  कि अमेठी के बलराम सिंह की 24 वर्षीया पुत्री सुकन्या सिंह और उसका परिवार 13 दिसम्बर 2006 को राहुल गांधी से उनके संसदीय निर्वाचन में मिला था। तब से ही युवती और उसका परिवार लापता’ है। कांग्रेस नेता और उनके पांच विदेशी मित्रों’ ने कथित रूप से 24 वर्षीया सुकन्या सिंह पर बलात्कार किया।लड़की के घर इस घटना के बाद ही ताला लगा है। परिवार कहां हैइस बारे में ग्रामीण कुछ भी बताने के लिए तैयार नहीं हैं।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कांग्रेस के युवराज राहुल गाँधी को नोटिस भेज सुकन्या के बारे में बताने को कहा था। कुछ लोग ऐसा तर्क देंगे की ये याचिका कोर्ट के खारिज की थी तो उन्हे याद दिला दूँ की आज कल जज अभिसेक मनु सिंघवी की राते रंगीन करके भी बन सकते हैं तो कैसे वो युवराज के खिलाफ फैसला देंगे ?? सीडी आप सब ने देखी होगी जिसमे जज बनाने का प्रायोजित कार्यक्रम चलाया जा रहा था कांग्रेस द्वारा।
कांग्रेस इस घटना को सिर्फ अपने पाप छुपाने के अस्त्र की तरह और मोदी की छवि से ध्यान भटकाने के उद्देश्य से देख रही है। सुब्रमण्यम स्वामी ने अभी कहा की सरकार चाहे तो बिना संसद सत्र बुलाये भी एक आर्डिनेंस से कानून बना सकती है मगर हम कांग्रेस से बलात्कार के खिलाफ कानून बनाने की उम्मीद करके  लोकपाल काला धन,भोपाल कांड जैसा धोखा फिर खाएँगे क्यूकी अपनों के लिए फांसी का फंदा बनाना सर्वदा पीड़ादायक होता है और ये बार कांग्रेस पर भी लागू होती है ॥अंतत इस आंदोलन का पिंडदान कांग्रेस कुछ निर्दोष हत्याए और दमनचक्र  चला कर अगले 24 घंटे मे कर देनी वाली है और हम सब फिर से नयी खबर के इंतजार मे ................ 

जय श्री राम

लेखक : आशुतोष नाथ तिवारी 


शनिवार, 22 दिसंबर 2012

भारतीय गणितज्ञ “रामानुजम” (1887-1920)

RAMANUJAM-रामानुजम 

गणित के क्षेत्र में अनेक विद्वान हुए हैं, जिनमे रामानुजम भी एक उच्चकोटि के गणितज्ञ रहे हैं, इनका जन्म तमिलनाडुप्रांत के इरोदनामक ग्राम मे एक निर्धन ब्राह्मण परिवार मे 22 दिसम्बर, 1887 मे हुआ इनके पिता कुम्भ कोनम्ग्राम मे रहते थे और वही पर एक कपङे वाले के यहां मुनीमी करते थे ।
रामानुज के जन्म के बारे मे एक किंवदंती प्रचलित है, कहा जाता है कि विवाह होने के कई वर्ष बाद तक उनकी माता को कोई संतान नही हुई । इससे वह हमेशा चिंतित रहती थी । अपनी पुत्री को चिंतकुल देख कर रामानुजम् के नाना नामकल गाँव मे जाकर वहाँ नामगिरी देवी की आराधना की, इसी के फलस्वरूप श्रीनिवास रामानुजम्का जन्म हुआ ।     
5 वर्ष की अवस्था मे रामानुजम् को स्कूल भेजा गया । वहाँ 2 वर्ष के बाद इनको कुम्भ-कोनम् हाईस्कूल मे पढ़ने भेजा गया, इन्हे गणितशास्त्र मे विशेष रुचि थी । वे अपने सहपाठियो और गुरुओ से यह कभी नक्षत्रों के बारे मे तो कभी परिधि के बारे मे प्रश्न पूछते थे, वह जब कक्षा 3 मे पढ़ते थे, तो एक दिन जब अध्यापक समझा रहे थे कि किसी संख्या को उसी से भाग देने पर भागफल 1 होता है, तो रामानुजम् ने उसी समय पूछा, “क्या यह नियम शून्य के लिए भी लागू होता है ?” उन्होने इसी कक्षा मे बीजगणित की तीनों श्रेणियो समान्तर श्रेणी, गुणोत्तर श्रेणी और हरात्मक श्रेणी को पढ़ लिया था, जो कि आजकल इंटर मीडिएट कक्षा मे पढ़ाई जाती है । कक्षा 4 मे त्रिकोणमिति तथा कक्षा 5 मे Sin (ज्या) और Cos (कोज्या) का विस्तार समाप्त कर लिया था ।
17 वर्ष की आयु मे इन्होने  हाईस्कूल की परीक्षा योग्यता सहित उत्तीर्ण की, और इन्हे सरकारी छात्रवृत्ति प्रदान की गई । परंतु कालेज के प्रथम वर्ष तक पहुंचते- पहुंचते यह गणितशास्त्र मे इतने तल्लीन हो गए कि गणित के सिवाय और किसी के नही रहे और उसका परिणाम यह हुआ कि यह फेल हो गये, इससे इनकी छात्रवृत्ति रोक दी गई । अतः आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण इनको विश्बविधालय कि शिक्षा समाप्त करनी पङी ।
उन दिनो रामानुजम् को आर्थिक कठिनाइयो ने परेशान कर दिया इसी समय इनका विवाह भी कर दिया गया । विवाह हो जाने के कारण कठिनाइयां दुगनी हो गई, और वह शीघ्र नौकरी ढूँढने के लिए मजबूर हो गए । बङी कठिनाइयो के बाद इनको मद्रास ट्रस्ट मे 30 रुपये मासिक की नौकरी मिल गई, इसी बीच ड़ॉ॰ वाकर गणित मे उनकी दिलचस्पी से बहुत प्रभावित हुये उनके प्रयत्न से रामानुजम् को मद्रास विश्बविधालय से 2 वर्ष के 75 रूपये मासिक छात्रवृत्ति मिल गई तथा इनको क्लर्कीसे छुटकारा मिल गया । आर्थिक चिंताओ से मुक्त होकर इन्हे अपना सारा समय गणित के अध्ययन मे लगाने का सुअवसर प्राप्त हो गया ।
फिर इनहोने कुछ लेख लिखकर ट्रिनिटी कालेज के गणित के फैलो ड़ॉ॰ हार्ड़ी के पास भेजे, इन लेखो को देखकर ड़ॉ॰ हार्ड़ी तथा दूसरे अंग्रेज़ गणितज्ञ बहुत प्रभावित हुए । अतः वे लोग रामानुजम् को कैम्ब्रिज बुलाने का प्रयत्न करने लगे ।
सन् 1914 मे जब ट्रिनिटी कालेज के ड़ॉ॰नोविल भारत आये तो हार्डी ने उसे रामानुजम् से मिलने तथा उनको कैम्ब्रिज लाने का अनुरोध कर दिया था । भारत आने पर ड़ॉ नोविल ने रामानुजम् से भेट की । चरित नायक ने नोविल महोदय की प्रार्थना को स्वीकार कर लिया । इस पर नोविल महोदय (साहव) ने इनको 250 पौंड की छात्रवृत्ति देने के अतिरिक्त प्रारम्भिक व्यय तथा यात्रा व्यय देना भी स्वीकार कर लिया । इसमे से 60 रूपये प्रति मास अपनी माता को देने का प्रबंध करके 17 मार्च 1917 ई० को मि० नोबिल के साथ आप विलायत के लिए रवाना हो गए ।
28 फरवरी 1918 को आप रायल सोसाइटी के फैलो बन गए, इस सम्मान को प्राप्त करने वाले आप प्रथम भारतीय थे । 27 फरवरी 1919 को आप लंदन से भारत के लिए रवाना हुए और 27 मार्च को आप मुंबई पहुंचे । विदेश मे जलवायु अनुकूल न होने से आपका स्वस्थ्य गिर गया था । स्वस्थ्य खराब होने से इनको कावेरी कोदू मंडी ले जाया गया । वहाँ से उनको कुम्भ कोणम ले जाया गया । इनका स्वस्थ्य दिन पर दिन गिरता गया । फिर भी मस्तिष्क का प्रकाश अंत तक मंद नहीं हुआ, अंतिम समय तक वह कार्य मे लगे रहे। ‘Mock Theta Function’ पर उनका सब कार्य रोग शैय्या पर ही हुआ । हालात ज्यादा खराब होती देखकर मद्रास ले जाए गये ।  26 अप्रैल 1920 ई० को मद्रास के पास चेतपुर ग्राम मे इस विश्व विख्यात गणितज्ञ का शरीरांत हो गया । उनके निधन से गणित जगत निर्धन हो गया ।

गुरुवार, 20 दिसंबर 2012

गुजरात मे फिर कमल ने किया कमाल : मोदी की विजय के मायने



फोटो साभार: दीपक बाबा की बकबक 
जैसा की गुजरात चुनाव के नतीजे आज आ गए  और नरेंद्र मोदी पुनः बहुमत के साथ गुजरात की सत्ता पर काबिज होने जा रहे हैं। हालांकि ये बात लगभग तय थी की नरेंद्र मोदी की सरकार गुजरात मे दोबारा आने वाली है अब गुजरात चुनावों के फैसले के बाद कई बातें  निकलकर सामने आई है । सबसे स्वाभाविक बात ये है की नरेंद्र मोदी ने खुद को भाजपा के प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार के रूप मे स्थापित कर लिया है । अब  इस दावेदारी को औपचारिक या अनौपचारिक रखना है बहस और निर्णय  सिर्फ इसी बात का हो सकता  है । दूसरी ओर इसमे कोई दो राय नहीं की गुजरात मे विकास हुआ है मगर कम से कम नरेन्द्रमोदी और उनके प्रबन्धक ये अच्छी तरह से जानते हैं  की "विकास पुरुष" के गुणगान करना अलग बात है मगर विकास पुरुष को वोट करना दूसरी ॥ इसके ज्वलंत उदाहरण माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी 2004 मे रहे है । अब भी यदि गुजरात मे कोई निर्णायक कारक है तो वो है मुस्लिम बनाम हिन्दू वोटों का ध्रुवीकरण । ये एक ऐसा कटु सत्य  है जिसे हिंदुस्थान मे कश्मीर के बाद सबसे पहले गुजरात के लोगो ने स्वीकार किया है । शायद इन चुनाव परिणामो ने हिंदुस्थान मे 2030  के बाद से होने वाले चुनाओं एवं राजनीतिक परिदृश्य का एक परिलक्षण भी दिया है,वो ये है की अब आने वाले दो दसको मे भले ही राजीनीतिक पार्टियां दर्जनो हो मगर विचारधारा और गठबंधन सिर्फ दो ही होंगे । या तो आप हिन्दुत्व के समर्थक हैं या तो आप इस्लाम के झंडे के साथ है । दो दसको मे मुस्लिम जनसंख्या बढ़ेगी और आकडे बताते हैं की उस अनुपात मे हिन्दू जनसंख्या नहीं बढ़ेगी । और जम्मू और कश्मीर का उदाहरण ले तो जिस राज्य मे मुसलमान ज्यादा होंगे हिंदुओं पर अत्याचार और उनके धार्मिक रीति रिवाजों पर लगाम कसने की शुरुवात होगी और फिर हिंदुओं को मजबूरीवश या आत्मरक्षार्थ विभिन्न जतियों और सेकुलर जैसे शब्दो की परिभाषा से उठाकर "हिन्दू " बनकर किसी एक जगह वोट करना होगा जैसा कश्मीर मे हो रहा है। जनसंख्या के अनुपात से गुजरात मे अभी ध्रुवीकरण का दौर नहीं होना चाहिए था मगर मगर आतंक की पौध के बबूलरूपी काँटों ने गोधरा मे जिस प्रकार की चुभन हिन्दू समाज को दी थी वो सुसुप्त ज्वालामुखी 20 साल पहले फट पड़ा । इस बात को एक उदाहरण से और समझ सकते हैं जहां भी हिन्दू बहुसंख्यक है वहाँ बार बार सरकारे बदलती है क्यूकी वहाँ स्वाभाविक रूप से आतंकियों को सर उठाने का मौका कम मिलता है धार्मिक रीति रिवाजों मे हस्तक्षेप कम होता है अतः ध्रुवीकरण की संभावना कम हो जाती है ,इसी मौके का फायदा उठाकर "कांग्रेस" नामक पार्टी तुष्टीकरण के समर्थको के साथ सत्ता मे आ जाती है और हिमांचल प्रदेश के परिणाम इसका उदाहरण है।  हिमांचल मे हिन्दू बहुतायत है या हिंदुओं को स्वतन्त्रता है अपने विचारधारा पर चलने की अतः ध्रुवीकरण की संभावना कम है और हिन्दू विभाजित जिसका परिणाम क्या हुआ कांग्रेस पार्टी पर गंभीर आरोपो के बाद भी भाजपा सत्ता से बाहर हो गयी।   

इन सब तथ्यों से  एक बात तो स्पष्ट है की "विकास" ,प्रतिभाजीडीपीबिदेशी निवेश जैसे तथ्य उन्ही स्थानो पर चुनावी मुद्दा बन सकते हैं जहां या तो हिन्दू बहुसंख्यक  है और उसकी स्वतन्त्रता का अतिक्रमण नहीं हुआ है अल्पसंख्यक  बहुल स्थानो पर एकमात्र मुद्दा है इस्लाम का प्रचार और प्रकारांतर से  शरीयत लागू करना । 
2014 मे शायद भाजपा का एक धड़ा ये सोच रहा है की सेकुलरिज़्म का चोला ओढ़ कर कुछ अल्पसंख्यक मत आएंगे तो ये 2004 के "इंडिया शाइनिंग" के दौर मे वाजपेयी जी जैसे व्यक्तित्व को भी अल्पसंख्यक समुदाय अपना नहीं पाया । सत्य ये है की हिंदुस्थान मे अल्पसंख्यक  वोट सिर्फ उसी को मिलता है जो हिन्दू विरोधी हो । अतः इस प्रकार का आत्मघाती प्रयोग एक बुरे दिवास्वप्न से ज्यादा कुछ नहीं। 
भविष्य जो भी हो कम से कम आज मोदी जी की विजय ने हिंदुस्थान के हिंदुओं को खुश होने का एक कारण जरूर मिला है और भारतीय जनता पार्टी को 2014 चुनाओं मे सत्ता के एक सशक्त दावेदार के रूप मे उभरने के लिए संबल।
चलते चलते 
हिन्दू हो,कुछ प्रतिकार करो,तुम भारत माँ के क्रंदन काI
यह समय नहीं हैशांति पाठ और गाँधी के अभिनन्दन काII
यह समय है शस्त्र उठाने का,गद्दारों को समझाने का,
शत्रु पक्ष की धरती पर,फिर शिव तांडव दिखलाने काII
इन जेहादी जयचंदों की घर में ही कब्र बनाने का,
यह समय है हर एक हिन्दू के,राणा प्रताप बन जाने काI
इस हिन्दुस्थान की धरती पर ,फिर भगवा ध्वज फहराने काII

मंगलवार, 18 दिसंबर 2012

सरकार का "गरीबो भारत छोड़ो" आंदोलन: (गरीबी का कम होना-महज़ एक छलावा)



प्रसिद्द अर्थशास्त्री रेगनर नर्कसे ने कहा था की कोई व्यक्ति गरीब है क्योंकि वह गरीब है अर्थात गरीब व्यक्ति गरीबी की वजह से ठीक से भोजन नहीं कर पाता ,इसलिए उसका स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता जिसकी वजह से वह कुपोषण का शिकार रहता है ,वह ठीक से काम नहीं कर पाता फिर वह खर्च नहीं कर पाता इस प्रकार गरीबी का दुष्चक्र चलता रहता है और गरीब व्यक्ति गरीब बना रहता है !
हमारी सरकार गरीबी को कम करने के लिए हमेशा स्वयं को सजग दिखाती रही ,समय-समय पर तरह -तरह की योजनाओं का क्रियान्वयन करती रही ,गरीबी की गणना के लिए तरह-तरह की समितियों का गठन करती रही ,लेकिन इन सब के बीच सबसे बड़ा प्रश्न यही है की क्या सरकार वाकई में प्रतिबद्ध है गरीबी को कम करने के लिए ?क्योंकि कई बार सरकार द्वारा जारी आंकडें ही इनके क्रियाकलापों की पोल खोलते हैं.NSSO की रिपोर्ट के मुताबिक 1999-2000 में जहाँ देश में निर्धनता का प्रतिशत 26.1 का तो 2004-05 में यह प्रतिशत घटकर 21.8 रह गया ,लेकिन 2008 में सरकार द्वारा गठित तेन्दुलकर समिति ,जिन्होंने 2009 में रिपोर्ट प्रस्तुत की ,रिपोर्ट के मुताबिक 2004-05 में निर्धनता का प्रतिशत 37.2 था .हाल ही में आमदनी और खर्च संबंधी राष्ट्रीय सैंपल सर्वेक्षण संगठन [एनएसएसओ] के सर्वे में यह बात सामने आई है कि करीब 60 फीसद ग्रामीण आबादी रोजाना 35 रुपये से भी कम पर गुजर-बसर करने को मजबूर है। इनमें से भी 10 फीसदी लोगों की हालत तो और बदतर है। जीने के लिए वे सिर्फ 15 रुपये ही रोजाना खर्च कर पाते हैं। सरकार तमाम योजनाओं के जरिए गरीबी दूर करने के दावे कर रही हैलेकिन खुद उसी के आकड़े ही इन दावों की पोल खोल रहे हैं।

एनएसएसओ की ओर से जुलाई, 2009 से जून, 2010 के बीच कराए गए सर्वे के मुताबिक ग्रामीण इलाकों में एक व्यक्ति का औसत मासिक खर्च 1,054 रुपये है। वहीं शहरी इलाकों में यह आकड़ा 1,984 रुपये मासिक है। इस हिसाब से शहरवासी औसतन 66 रुपये रोजाना खर्च करने में सक्षम हैं। वैसे, 10 फीसद शहरी आबादी भी मात्र 20 रुपये पर गुजारा कर रही है। यह राशि ग्रामीण इलाकों से थोड़ी ही ज्यादा है।

सर्वे की मानें तो महीने के इस खर्च के मामले में बिहार और छत्तीसगढ़ के ग्रामीणों की हालत सबसे ज्यादा खराब है। यहा लोग करीब 780 रुपये महीने पर अपना भरण पोषण कर पाते हैं। यह रकम महज 26 रुपये रोजाना बैठती है। इसके बाद ओडिशा और झारखंड का स्थान हैजहा प्रति व्यक्ति 820 रुपये महीने का खर्च है। खर्च के मामले में केरल अव्वल है। यहा के ग्रामीण 1,835 रुपये मासिक खर्च करते हैं। शहरी आबादी के मासिक खर्च में महाराष्ट्र शीर्ष पर है। यहा प्रति व्यक्ति खर्च 2,437 रुपये है। बिहार इस मामले में भी सबसे पिछड़ा हुआ है। यहा की शहरी आबादी मात्र 1,238 रुपये महीने पर पेट पालती है।

एनएसएसओ के अनुमान पर ही योजना आयोग ने शहरी इलाकों में 28.65 रुपये और ग्रामीण इलाकों में 22.42 रुपये रोजाना कमाने वालों को गरीबी रेखा से नीचे रखा था। इन आकड़ों पर खूब बवाल मचा था। आयोग के मुताबिक वर्ष 2009-10 में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों [बीपीएल] की संख्या 35.46 करोड़ थी। वर्ष 2004-05 में देश के 40.72 करोड़ लोग इस रेखा से नीचे रह रहे थे।

योजना आयोग की नई शर्तों के मुताबिक शहरी इलाकों में रोजाना 28 रुपये से अधिक कमाने वाले और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिदिन 22 रुपये से अधिक आय करने वाले लोग गरीब नहीं है!

इन सबको देखते हुए मस्तिष्क में एक विचार का आना स्वाभाविक है की कांग्रेस सरकार ने गरीबी आंकलन के खाद्यान स्तर को बदल के मौद्रिक स्तर क्यों कर दिया ?कहीं इसमें भी तो उसकी कोई साजिश नहीं क्योंकि खाद्यान की कीमत तो घटती -बढ़ती  रहती है ,जबकि मौद्रिक स्तर अप्रभावित रहता है ,अर्थात सरकार कुछ न कर पाई तो गरीबों की थाली पे ही दे मारा !गरीबी आंकलन के लिए जिस ' Minimum Basket Of List' का निर्धारण सरकार ने स्वयं किया था ,आज वो उसी पे कायम नहीं है !

हाल ही में दिल्ली की मुख्यमंत्री माननीय शीला दीक्षित जी ने अन्नश्री योजना की शुरुआत करते हुए कहा कि वो गरीब परिवारों(औसतन 5 व्यक्ति के ) को अनाज के बदले में हर महीने 600 रुपए देंगी। मतलब एक व्यक्ति को खाने के लिए 4 रुपए प्रतिदिन... कितना भद्दा मज़ाक है शीला दीक्षित का क्यूकी 4 रुपए मे दो समय का खाना तो दूर एक कप चाय भी नहीं मिलती॥ उन्होनें कहा कि 600 रुपए में एक परिवार के लिए महीने भर का दालचावल और गेहूं तो मिल ही सकता है। लेकिन प्रश्न ये है की क्या इतने दाम खाद्य पदार्थ मिल जायेगा और अगर मिला भी तो उसकी गुणवत्ता क्या होगी ? लगता है मुख्‍यमंत्री साहिबा ने दो दिन पहले आयी भारत के लोगों की औसत आयु की रिपोर्ट नहीं पढ़ी। उसमें लिखा है कि भारत के पुरुष 54 और महिलाएं 56 वर्ष की आयु के बाद बीमार रहने लगते हैं। इसका प्रमुख कारण फलों का सही मात्रा में नहीं मिलना है। रिपोर्ट में लिखा है कि भारतीय बच्‍चोंमहिलाओं और पुरुषों को पर्याप्‍त मात्रा में फल नहीं मिल पाते हैं। इस कारण विटामिन की कमीकुपोषणखून की कमीहीमोग्‍लोबिन की कमीआम है। शीला दीक्षित के बयान से साफ है कि दिल्ली के गरीबों को सिर्फ खराब क्‍वालिटी का दालचावल और रोटी खाने का अधिकार है। फल और हरी सब्जियों के बारे में वो सपने में भी नहीं सोच सकता !

इनसबके पश्चात् एक प्रश्न सरकार के मंसूबों पर उठना स्वाभाविक है की क्या सरकार वाकई में गरीबी मिटाना चाहती है या नित्य -नए आंकड़ों द्वारा जनता को भ्रमित करती है !

शनिवार, 15 दिसंबर 2012

वेद: महान आविष्कारों के स्त्रोत-1 (Great Inventions of Vedic India)


We owe a lot to the Indians, who taught us how to count, without which no worthwhile scientific discovery could have been made.
-Albert Einstein
हम भारतियों के प्रति हमेशा कृतज्ञ रहेंगे जिन्होंने हमें गणना करना सिखायाउसके बिना किसी वैज्ञानिक आविष्कार का होना संभव नहीं था।
-अलबर्ट आइन्स्टीन 
If there is one place on the face of earth where all dreams of living men have found a home from the very earliest days when man began the dream of existence, it is India.
-French scholar Romain Rolland
अगर दुनिया में ऐसा कोई स्थान हैजिसे मानव के उन सारे सपनों का घर कहा जाये,जो सपने मानव बहुत शुरुआत से अस्तित्व के लिए देखा करता थातो वो स्थान है भारत।
-फ़्रांसीसी विद्वान् रोमेन रोलांड

हड़प्पा-मोहनजोदारो सभ्यता के साथ इतिहास में जिस सभ्यता का वर्णन आता है वो है आर्य-सभ्यता। आर्य मूल भारतीय थे या फिर मध्य एशिया से आये थेये अभी भी शोध का विषय बना हुआ है। लेकिन आर्यों की मौलिकता के बारे में महर्षि दयानंद सरस्वती के द्वारा प्रस्तुत किये गए तथ्य काफी तर्कसंगत लगते हैं। ये वो समय था जब यूरोपीय देशों के लोग जंगलों में घुमन्तु की जिन्दगी जी रहे थेपूरी दुनिया अज्ञानता के अँधेरे में सोयी हुयी थीउस समय भारत के लोग ऐसी कार्यशालाओं का व्यापार (Trade of workshops) चला रहे थे जिसमें धातु-निष्कर्षण (Mettalurgy), वस्त्र रंजन (Dyeing of Fabric), औषधि-निर्माण (Drugs Formation), शल्य-चिकित्सा (Surgery) जैसे काम हुआ करते थे।
आर्यों के जीवन का मूल आधार थे 'वेद'.



वेदों को सिर्फ किसी धर्म के धर्म-ग्रन्थ मान लेना बहुत बड़ी गलती होगी।
वेदों की रचना उस समय हुयी थी जब विभिन्न सम्प्रदाय हुआ ही नहीं करते थे।
उस समय केवल एक धर्म था सनातन-मानवता का धर्म।
वेद किसी संप्रदाय-विशेष को आध्यात्मिक ज्ञान देने मात्र के ग्रन्थ नहीं हैं।
वेदों में Physics, Chemistry, Mathematics, Cosmology, Biology आदि के विषयों पर अथाह सिद्धांत लिखे हुए हैं।
सवाल ये उठता है की अगर वेदों में इतना ज्ञान है तो ये जग जाहिर क्यों नहीं होता। इसका कारण है वेदों की अत्यंत जटिल भाषा। वेदों में लिखे टेक्स्ट्स को decode करना कितना मुश्लिक काम है ये बात दैनिक भाष्कर की 2012 की इस खबर से साफ़ हो जाता है-Pre-Vedic India knew about DNA: Indore scholar . आज वेदों को decode  करने के लिए कई संस्थाएं काम कर रही हैं , उनमें से इन्दौर के एक विद्वान् ने वेदों में DNA के वर्णन को सफलतापूर्वक decode करने का दावा किया है। लेकिन वैदिक भारत के कई विद्वानों ने वेदों के बहुत से श्लोकों को समझ कर उन पर न सिर्फ अपनी भाषा में संहितायें लिखी बल्कि उनको व्यावहारिकता में भी लाया।
यहाँ पर मैं वैदिक भारत द्वारा किये गए महान वैज्ञानिक आविष्कारों और उनके आविष्कारकों में से कुछ का वर्णन कर रहा हूँ।


600 ईसा पूर्व (600 BC) कनद ऋषि ने परमाणु(Atom) का सिद्धांत दिया था। कणद का कथन है कि-
"सभी वस्तुएं परमाणु(Atoms) से बनी हुयी हैं, विभिन्न परमाणु आपस में जुड़ कर अणु(Molecule) का निर्माण करते हैं"
उन्होंने ये कथन John Dalton से 2500 वर्ष पहले दिया था।
इसके आगे कणद परमाणुओं की Dimensions, गतियों और आपस में रासायनिक अभिक्रियाओं(Chemical Reactions)  का वर्णन करते हैं।

Acharya Kanad: Atomic Theory was given in 600 BC

गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत (Law of Gravity):

400-500 ईसा पूर्व भाष्कराचार्य ने अपनी किताब सूर्य-सिद्धांत में ये कथन लिखा था-
" वस्तुयों का पृथ्वी पे गिरने का कारण, पृथ्वी द्वारा उन पे लगने वाला आकर्षण बल है। पृथ्वी में ये क्षमता उसके अत्यधिक गुरुत्व (Mass) के कारण आती है।"
उन्होंने ये कथन Sir Issac Newton से लगभग 1200 वर्ष पहले दिया था।
सूर्य सिद्धांत में भाष्कराचार्य लिखते हैं-
"पृथ्वी, ग्रह, चंद्रमा, सूर्य आदि इस गुरुत्वाकर्षण के कारण अपने कक्षक में बने रहते हैं"

Bhashkaracharya: Law of Gravitation was given in 500 BC

10वीं सदी में नागार्जुन ने अपनी किताब रसरत्नाकर Rasaratnanakara में बहुत से धातुकर्म विधियों के बारे में लिखा है जैसे:
  • विभिन्न धातुओं जैसे सोना,चांदी,तम्बा और टिन का उनके अयस्कों (Ores) से निष्कर्षण।
  • द्रवीकरण(liquefaction),आसवन(distillation),उर्ध्वपातन(sublimation) आदि विधियों का वर्णन।
  • विभिन्न रस (Liquid Metal) जैसे पारा (Mercury) का निर्माण।
धातुकर्म के क्षेत्र में भारत 5000 वर्षों से अधिक समय तक विश्व-गुरु रहा है।
सोने के आभूषण 3000 BC से पहले उपलब्ध थे।कांसे और पीतल के मिले बर्तनों का अनुमान 1300 BC  लगाया गया है।
जस्ता (जिंक) को इसके अयस्क (Ore) से आसवन विधि द्वारा निकालना भारत में 400 BC में ज्ञात था, European William Campion से 2000 वर्ष पहले।
ताम्बे की मुर्तियों की आयु का अनुमान 500 BC लगाया गया है।
दिल्ली में एक लौह स्तम्भ है जो 400 BC पुराना है और उस पर आज तक जंग या क्षय का कोई निशान नहीं है।

Nagarjuna: Invention of Mettalurgy

Bouddhayan: Great mathematician of 600 BC

पाइथागोरस प्रमेय या बौद्धायन प्रमेय (Pythagorean Theorem or Baudhayana Theorem):

ईसा से 6 सदी पूर्व बौद्धायन ने अपनी किताब बौद्धायन सुल्ब सूत्र में Baudhayana Sulba Sutra में ये कथन लिखा है:
dīrghasyākṣaṇayā rajjuḥ pārśvamānī, tiryaḍam mānī,
किसी समकोण त्रिभुज में दीर्घ-अक्ष(Hypotenuse) का वर्ग, रज्जू(Base) और पार्श्ववमिनी(Hight) के वर्ग के योग के बराबर होता है।

पाई π का मान (The Value of Pi π):

बौद्धायन ने वृत की परिधि और व्यास का अनुपात 3 बताया था।लेकिन उनके बाद 499 AD में आर्यभट्ट ने π के मान की गणना दशमलव के 4 स्थान तक की (3.1416).
825 AD में एक अरबी गणितज्ञ मुहम्मद इब्ना मूसा ने ये कहा कि ये मान भारतियों के द्वारा दिया गया है।

शून्य की अवधारणा (The Concept of 'Zero'):

Zero की अवधारणा शुरूआती संस्कृत लेखों में 'शून्य' के रूप में आती है और पिंडाला के 'चंदा: सूत्र' (200 AD) में भी समझायी गयी है। भ्रह्मगुप्त के 'ब्रह्म फुता सिद्धांत' (400 AD) में शून्य को विस्तार से समझाया गया है। भारतीय गणितज्ञ भाष्कराचार्य ने सिद्ध किया की X को 0 से विभाजित करने पर अनंत (Infinty) आता है जिसको फिर कितना ही विभाजित करें अनंत ही रहता है।
लेकिन शून्य के महत्व के आविष्कार का श्रेय आर्यभट्ट को जाता है।

Aryabhatt: Great Mathemeticial, who has given Concept of Decimal and Zero

दशमलव प्रणाली (Decimal System):


दशमलव के आविष्कार का भी मुख्य श्रेय आर्यभट्ट को दिया जाता है। उन्होने हर गणना का आधार  10 को बनाया जिस से बड़ी से बड़ी संख्या भी 10 की घात के रूप में आसानी से व्यक्त की जाने लगीं।
अंग्रेजी का शब्द Geometry संस्कृत के शब्द 'ज्यामिति' से आया हुआ है।जिसका अर्थ होता है 'पृथ्वी का मापन'.
इसी तरह से अंग्रेजी का शब्द 'Trignometry' भी संस्कृत के शब्द 'त्रिकोणमिति' से बना है।
युक्लिड का निर्माण 300 BC में Geometry के अविष्कार के बाद हुआ जबकि भारत में ज्यामिति का उद्भव 1000 BC में ही आग वेदियों (fire altars) के निर्माण से हो गया था  "चतुर्भुज में वर्ग का निर्माण".
सूर्य सिद्धांत में त्रिकोणमिति का प्रखर वर्णन किया है, जो कि 1200 साल बाद यूरोप में 1600 इसवी में Briggs द्वारा दिया गया।
भाष्कराचार्य ने 1150 AD में अपनी प्रसिद्ध किताब 'सिद्धांता-सिरोमनलिखी,जिसके चार भाग हैं:
  • लीलावती(Arithmetic)
  • गोलाध्याय (Celestial Glob)
  • बीजगणित (Treatise of Algebra)
  • ग्रहगणित (Mathematics of Planets)
भारत से ही sinƟ funtion 8वीं सदी में अरब में पहुँचा। भारत में sinƟ को 'ज्या' कहते थे जो कि अरब में Jiba / Jyb में अनुवादित हो गया। अरबी में Jaib शब्द का मतलब होता है महिला-पोशाक का गले के पास से खुला होना, Jaib शब्द का लैटिन में अनुवाद हुआ Sinus, जिसका अर्थ होता है पोशाक में तह या Curve. और इस प्रकार अंत में Sine (sinƟ) शब्द बना।

10 की घात 53 की गणना (Raising 10 to the Power of 53!):

 आज की गणित में 10 की अधिकतम घात के लिए उपसर्ग (Prefix) है- 'D' दस की घात 30 (from Greek Deca).
जबकि 100 BC  पहेल भारतियों ने 10 की घात 53 तक के लिए सटीक नामों का आविष्कार कर लिया था।
1= एकं =1, 10 था दशकं , 100 था  शतं  (10 to the power of 10), 1000 tha सहस्रं  (10 power of 3), 10000 था  दशासहस्रम  (10 power of 4), 100000 था  लक्शः  (10 power of 5), 1000000 था दशालक्शः (10 power of 6), 10000000 था कोटिः  (10 power of 7)……विभुतान्गामा  (10 power of 51), तल्लाक्षनाम  (10 power of 53).

word-numeral system, अंक को 10 के गुणांक के रूप में लिखते हुए आगे बढ़ता है। जैसे संख्या 60799 को संस्कृत में इस तरह लिखते हैं-
"सस्टीम सहस्र सप्त सतानी नवाटीम नवा"
(sastim (60), shsara (thousand), sapta (seven) satani (hundred), navatim (nine ten times) and nava (nine))
इस system के नियम इस प्रकार है:
1.शुरू के नौ अंकों के नाम-eka, dvi, tri, catur, pancha, sat, sapta, asta, nava
2.अगले नौ अंको का समूहउपर्युक्त प्रत्येक अंक को 10 से गुना करके प्राप्त होता है-dasa, vimsat, trimsat, catvarimsat, panchasat, sasti, saptati, astiti, navati
3. इसी प्रकार अगला समूह 10 के अगले गुणांक के रूप में प्राप्त होता है-satam sagasara, ayut, niyuta, prayuta, arbuda, nyarbuda, samudra, Madhya, anta, parardha….

प्राचीन भारतीय वो पहले लोग थे जिन्होंने सूर्य के Heliocentric System का सुझाव दिया.
उन्होंने  प्रकाश का वेग 1,85,016 miles/sec  परिकलित किया.
उन्होंने पृथ्वी का चन्द्रमा के बीच की दूरी भी परिकलित की- चन्द्रमा के व्यास का 108  गुना.
पृथ्वी और सूर्य के मध्य दूरी का अनुमान लगाया- पृथ्वी के व्यास का 108 गुना.
ये सब बातें महान वैज्ञानिक गैलिलिओ से हजारों साल पहले की हैं.
                   

पृथ्वी को सूर्य-कक्षा में लगाने वाला समय (Time taken for Earth to orbit Sun):

भारतीय गणितग्य भाष्कराचार्य ने अपने निबंध सूर्य-सिद्धांत मेंपृथ्वी द्वारा सूर्य के चारों ओर  एक  चक्कर पूरा करने में लगने वाले समय का दशमलव के नौंवें स्थान तक सही मान बताया (365.258756484 दिन).
भाष्कराचार्य के सैकड़ों वर्ष बाद 5वीं में astronomer Smart ने इसी मान की गणना की।

लेख के अगले भाग मे वेदो के कुछ अन्य महत्त्वपूर्ण महान आविष्कार

लेखक: दिव्य प्रकाश श्रीवास्तव